
पटना, २० फरवरी।
बिहार विधानसभा में शिक्षा बजट पर चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने जोरदार भाषण से सदन में सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने अपने वक्तव्य की शुरुआत संस्कृत के श्लोक तमसो मा ज्योतिर्गमय से की। उन्होंने कहा कि जब वे सदन में खड़ी हैं तो यह श्लोक उनके मन में गूंज रहा है। मैथिली ने पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि कभी हालात ऐसे थे कि महिलाएं घर से बाहर निकलने में भी असुरक्षित महसूस करती थीं। आज वही महिलाएं दरभंगा से पटना तक सुरक्षित सफर कर रही हैं। उनके इस बयान पर सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। मैथिली ठाकुर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या सभी को वह बिहार याद है, जिसे ‘जंगलराज’ कहा जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। सरकारी स्कूलों की इमारतें जर्जर थीं और कई जगहों पर ताले लटकते थे। बजट तो आता था, लेकिन जमीन पर उसका असर नहीं दिखता था। गरीब परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा दूर की बात थी, क्योंकि घर में दो वक्त का भोजन भी मुश्किल था। उन्होंने कहा कि उस दौर के गवाह आज विपक्ष में बैठे लोग भी हैं। अपने भाषण के दौरान मैथिली ठाकुर ने लालू प्रसाद यादव की तुलना महाभारत के धृतराष्ट्र से की। उन्होंने कहा कि उस समय के ‘राजा’ को बिहार रूपी हस्तिनापुर की चिंता नहीं थी। उन्हें केवल अपने ‘दुर्योधन’ की फिक्र थी।
इसी क्रम में उन्होंने तेजस्वी यादव को दुर्योधन बताया। इस टिप्पणी के बाद आरजेडी विधायकों ने कड़ा विरोध जताया। सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। मैथिली ने कहा कि महाभारत में जैसे युधिष्ठिर के शासन में शांति स्थापित हुई, उसी तरह नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार विकास और शिक्षा के रास्ते पर आगे बढ़ा। उन्होंने विशेष रूप से साइकिल योजना का उल्लेख किया। कहा कि विपक्ष ने इस योजना का मजाक उड़ाया था।




















