परीक्षा के दौर में दबाव नहीं, भरोसा बढ़ाना जरूरी

कोरबा। बोर्ड परीक्षा शुरू हो चुकी हैं जबकि और गृह परीक्षा का समय निकट है। परीक्षा से बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता भी बढ़ गई है। ऐसे में जरूरी यह है कि बच्चों को अच्छे अंक लाने के दबाव से उबारने क साथ और उनके मन से परीक्षा का भय दूर किया जाए।
कोरबा जिले में दसवीं और बारहवीं की परीक्षा 98 केंद्रों में हो रही है। 22 हजार 287 विद्यार्थियों का पंजीकरण इसके लिए हुआ है। परीक्षा बेहतर तरीके से निपटाने प्रबन्ध हुए है। इन सबके बीच कई सवाल भी है। यदि बच्चे लगातार इस डर में रहें कि कम अंक आने पर उन्हें डांट या तिरस्कार का सामना करना पड़ेगा, तो उनका आत्मविश्वास कमजोर होगा। इसका सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य और प्रदर्शन पर पड़ेगा। साडा कन्या हायर सेकेंडरी के प्राचार्य रणधीर सिंह ने कहा कि शिक्षकों और अभिभावकों को बच्चों से खुलकर संवाद करना चाहिए। उन्हें यह समझाना होगा कि मेहनत और ईमानदारी से की गई तैयारी ही सबसे बड़ी सफलता है। अंक केवल मूल्यांकन का एक माध्यम हैं, किसी बच्चे की योग्यता का अंतिम पैमाना नहीं। सामाजिक कार्यकर्ता राजू सोनी का मानना है कि छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक माहौल बनाना जरूरी है। परीक्षा के दौर में बच्चों से फ्रेंडली पेश आएं और उनकी कठिनाई को सहजता से निराकृत करने की कोशिश हो। ऐसा होने पर वे प्रोत्साहित होंगे। राज्य शिक्षा अलंकरण से सम्मानित शिवराज शर्मा कहते हैं कि जब बच्चे तनावमुक्त वातावरण में पढ़ाई करते हैं, तो उनका प्रदर्शन स्वत: बेहतर होता है। अक्सर देखा जाता है कि अभिभावक अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करने लगते हैं। यह प्रवृत्ति बच्चों में हीन भावना और तनाव को बढ़ाती है। इसके बजाय उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों की सराहना की जानी चाहिए।

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