
राहौद । नगर के ठाकुर देव मंदिर परिसर में संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ किया गया है। जहां भागवत सप्ताह यज्ञ में सत्संग लाभ के साथ भगवान की कथा और संकीर्तन का लाभ प्रतिदिन सैकड़ो श्रोता प्राप्त कर रहे हैं। श्रीमद्भागवत कथा के ब्यास पंडित देव कृष्ण शर्मा ने श्रोताओं को बताया कि श्रीमद् भागवत संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए यह सर्वश्रेष्ठ सत्कर्म।है। भगवान के विविध लीलाओं का और अवतारों का इतिहास और संहिता भी यही है। संसार के लोगों को भागवत से भक्ति ज्ञान वैराग्य और तप का पुण्य फल प्राप्त होता है। भागवत
श्रवण का पुण्य लाभ भगवान का भक्त बनना और जीवन को भागवत पारायण बनाना है। भक्ति करके ही हम मुक्ति। और सद्गति के अधिकारी बन सकते हैं। भागवत महापुराण
गर्जना करके कहता है कि मुझे आत्मसात करो मैं तुम्हें सद्गति प्रदान करूंगा। इसी श्रीमद्भागवत का आश्रय लेकर भक्ति देवी के दोनों बेटे ज्ञान और वैराग्य को किशोर अवस्था की प्राप्ति हुई, उनकी जरवस्था दूर हुई थी। भागवत महापुराण को पुराणों का तिलक कहा गया है इसे पंचम वेद की उपाधि दी गई है। भक्ति में वह जादू है कि 5 वर्ष के बालक ध्रुव जी को भगवान साक्षात मिले थे। भगवान हमेशा अपने भक्त के वशीभूत हो जाते हैं और अपने भक्त का मान बढ़ाने के लिए वे अजन्मा तो कहलाते हैं परंतु संपूर्ण विश्व का कल्याण करने के लिए बार-बार अवतार भी लेते हैं। आचार्य देव कृष्ण महाराज ने बताया कि अपने भक्त का मान बढ़ाने के लिए भगवान खंबे से भी प्रकट हो जाते हैं। भगवान भक्ति के वशीभूत होते हैं। भक्ति हर व्यक्ति के हृदय में प्रवेश नहीं करती। भक्ति चाहे तो 5 वर्ष के बालक के मन में प्रवेश करे नहीं तो अस्सी साल के दादाजी को भी भक्ति नहीं होती। भक्ति जहां चाहता है भगवान में वही आते हैं आवश्यकता है, हमारे पवित्र भावनाओं की। भागवत केवल कथा नहीं है, यह तो भगवान के भक्तों की कथा से परिपूर्ण है।






















