कोई झाडिय़ों में छिपा तो कोई कैंपस के जंगल में, जेएनयू हिंसा में एबीवीपी के छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

नई दिल्ली। जेएनयू परिसर में एक बार फिर हिंसक झड़प की घटना सामने आई है, जिसने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए है। छात्रों का कहना है कि परिसर में लगातार बढ़ते विवाद, धरना-प्रदर्शन और टकराव से पढ़ाई प्रभावित हो रही है और गैर-राजनीतिक छात्रों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। ताजा मामला सोमवार देर रात छात्र संगठनों के बीच मारपीट से जुड़ा है, जिसके करीब 1.30 बजे शुरू होकर सुबह लगभग 3 बजे तक चलने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इस दौरान वामपंथी छात्रों ने एबीवीपी छात्रों के साथ मारपीट की। इस दौरान छात्रों को जहां भी छुपने की जगह मिली छुप गए। आरोप है कि कई छात्रों को वामपंथी छात्रों ने ढूंढकर मारा। कई एबीवीपी छात्र अपनी जान बचाने के लिए झाडिय़ों में छुपे, तो कई घने कैंपस के घने जंगल में। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों का आरोप है कि वे केवल एक प्रदर्शन देखने पहुंचे थे, तभी एक समूह ने उन्हें घेरकर लात-घूंसों, बेल्ट और ईंट-पत्थरों से उन पर हमला कर दिया। कुछ छात्रों ने दावा किया कि हमलावरों के पास धारदार वस्तुएं भी थीं, जिससे अफरा-तफरी मच गई। मारपीट में कई छात्रों के घायल होने और कुछ की तबीयत बिगडऩे की भी सूचना है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई छात्र खुद को बचाने के लिए हॉस्टल और कैंपस के अलग-अलग हिस्सों में छिपते दिखाई दिए। घटना से जुड़े वीडियो में एक सुरक्षाकर्मी भी नजर आ रहा है। आरोप है कि लंबे समय तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रहने के बावजूद झड़प की रोकथाम के प्रभावी प्रयास नहीं हुए।
जेएनयू सुरक्षा और जेएनयू प्रशासन की ओर से छात्रों को रोकने के कोई ऑर्डर नहीं मिले और न ही प्रशासन की ओर से इस इस मामले को लेकर आधिकारिक बयान जारी किया गया है। छात्रों का कहना है कि हाल के समय में परिसर में तोडफ़ोड़ और विवाद की घटनाओं ने पढ़ाई के माहौल को प्रभावित किया है। इस ताजा घटनाक्रम के बाद सुरक्षा व्यवस्था, रात्रिकालीन निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज हो गई है। छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, जबकि प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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