
कोलकाता, २३ फरवरी ।
देश के पूर्व रेल मंत्री और एक समय तृणमूल कांग्रेस के नंबर 2 नेता माने जाने वाले मुकुल रॉय का सोमवार को निधन हो गया। वे कोलकाता के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने 71 साल की उम्र में रात करीब 1.30 बजे अंतिम सांस ली। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने कहा, वह कई बीमारियों से पीडि़त थे। मुकुल रॉय पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे, जिसका गठन जनवरी 1998 में हुआ था। मुकुल रॉय का राजनीतिक कद एक वक्त इतना बड़ा था कि वे कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी थे। मुकुल रॉय ने बंगाल में यूथ कांग्रेस से अपने करियर की शुरुआत की थी।पश्चिम बंगाल में टीएमसी की स्थापना के बाद उन्होंने पार्टी में बनर्जी के साथ काम किया और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। बाद में वे दिल्ली की राजनीति में टीएमसी का एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे। वे 2006 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 2009 से 2012 तक राज्यसभा में पार्टी के नेता के रूप में कार्य किया।यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में उन्होंने जहाजरानी राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया, और मार्च 2012 में पार्टी के सहयोगी दिनेश त्रिवेदी की जगह रेल मंत्री का पदभार संभाला था। कभी ‘बंगाल की राजनीति के चाणक्य’ के रूप में जाने जाने वाले रॉय को तृणमूल कांग्रेस में नंबर दो माना जाता था और वे बंगाल और दिल्ली दोनों में पार्टी के लिए एक प्रभावशाली कार्यकर्ता थे। साल 2011 के बाद जब टीएमसी ने 34 साल के वामपंथी शासन का अंत किया और ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं, तब रॉय ने पार्टी को मजबूत करने में योगदान दिया। मुकुल रॉय 2015 तक पार्टी के महासचिव थे।
इस दौरान सीपीआई (एम) और कांग्रेस से दलबदल की एक अभूतपूर्व लहर की देखरेख की।





















