बिरगहनी (च) में नियमों को ताक पर रख हो रहा राखड़ डंपिंग, ग्रामीणों और पर्यावरण पर मंडराया खतरा

जांजगीर-चांपा। जिले के ग्राम पंचायत बिरगहनी (च) में इन दिनों पावर प्लांटों से निकलने वाली कोयला राखड़ का डंपिंग यार्ड विवादों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां प्रशासन द्वारा दी गई अनुमति की धज्जियां उड़ाते हुए मनमाने ढंग से राखड़ का अवैध भंडारण किया जा रहा है, जिससे न केवल आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि भविष्य में बड़े जल संकट और प्रदूषण की स्थिति निर्मित हो रही है।
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित डंपिंग कर्ताओं ने कम जमीन की अनुमति ली थी, लेकिन वर्तमान में वे निर्धारित सीमा से कहीं अधिक जमीन पर राखड़ डाल रहे हैं। इतना ही नहीं, सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज करते हुए राखड़ के ढेर को 10-15 फीट से अधिक ऊंचाई तक ढ़ेर कर दिया गया है।
आवागमन बाधित और दुर्घटना का भय
सडक़ के किनारे और रिहायशी इलाकों के करीब हो रहे इस डंपिंग के कारण राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हवा चलते ही राखड़ उडऩे से विजिबिलिटी कम हो जाती है, जिससे दुपहिया वाहन चालकों के फिसलने एवं गिरने का डर बना रहता है जिससे दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।
हसदेव नदी पर मंडराया ‘प्रदूषण’ का खतरा
ग्रामीणों ने आगामी मानसून को लेकर बड़ी चिंता जताई है। उनका कहना है किनाले में बहाव- बरसात के समय यह राखड़ बहकर सीधे पास के नालों में जाएगी।
हसदेव नदी का प्रदूषण: ये नाले आगे चलकर जीवनदायिनी हसदेव नदी में मिलते हैं। राखड़ के मिलने से नदी का पानी जहरीला और दूषित हो जाएगा, जिसका सीधा असर जलीय जीवों और नदी किनारे बसे गांवों के निवासियों पर पड़ेगा।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
इतने बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध डंपिंग के बावजूद संबंधित विभाग की चुप्पी पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल इस डंपिंग को रुकवाया जाए और सीमांकन कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की रक्षा हो सके।
राखड़ के बारीक कण फेफड़ों के लिए घातक हैं और नदी में इसका मिलना पूरे क्षेत्र के इकोसिस्टम को बर्बाद कर सकता है। प्रशासन को समय रहते जागना होगा।

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