कर्नाटक में ‘जुबानी जंग’: स्वास्थ्य विभाग के उर्दू विज्ञापन पर भड़की भाजपा, सिद्धरमैया बोले- ‘क्या यह गलत है?’

बेंगलुरु। कर्नाटक में स्वास्थ्य विभाग के एक विज्ञापन को लेकर सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। विवाद की जड़ एक उर्दू दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित विज्ञापन है, जिसे भाजपा ने ”तुष्टीकरण की राजनीति” करार दिया है। विवाद का मुख्य कारण राज्य सरकार ने बुधवार को हीमोफीलिया के मरीजों के लिए ‘कुसुम संजीवनी’ उपचार कार्यक्रम और मुफ्त एम्बुलेंस सेवाओं का शुभारंभ किया।

इस कार्यक्रम के प्रचार के लिए विभिन्न भाषाओं के समाचार पत्रों में विज्ञापन दिए गए थे। उर्दू अखबारों में विज्ञापन उर्दू भाषा में प्रकाशित हुआ, जिसे भाजपा ने कन्नड़ भाषा का अपमान और प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन बताया। भाजपा के आरोप भाजपा ने एक्स पर पोस्ट कर सरकार को ‘कन्नड़ विरोधी’ बताया और मुख्यमंत्री सिद्दरमैया तथा उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से सवाल किया कि क्या राज्य की प्रशासनिक भाषा उर्दू है?

स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव पर निशाना साधते हुए भाजपा ने कहा कि वे अपने घर में उर्दू बोलें, लेकिन सरकारी विज्ञापनों में कन्नड़ की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकार का पलटवार मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विज्ञापन सभी प्रमुख भाषाओं के पाठकों तक पहुंचने के लिए दिए जाते हैं। उन्होंने पूछा, ”’क्या उर्दू अखबारों को विज्ञापन देना गलत है?”’ वहीं स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने भाजपा पर जनता को गुमराह करने और अनावश्यक विवाद पैदा करने का आरोप लगाया।

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