
कोरबा। एसईसीएल की गेवरा, दीपका और कुसमुंडा खदानों में मेंटेनेंस कार्य को लेकर बड़ा वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक्सवेशन कार्य में लगे डंपर, डोजर और शॉवेल मशीनों के रखरखाव में कार्यरत मजदूरों को एचपीसी (हाई पावर कमेटी) की निर्धारित दर पर भुगतान नहीं किया जा रहा, जिससे करोड़ों रुपए के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
हमारे संवाददाता ने बताया कि खदानों में मेंटेनेंस कार्य के लिए जारी वर्क ऑर्डर के तहत तीन बड़ी कंपनियां जेमको, पी एंड एच और एल एंड टी नियोजित हैं। आरोप है कि इन कंपनियों को ठेकेदारों के माध्यम से टीम लीज पर श्रमिक उपलब्ध कराए जाते हैं, लेकिन सुरक्षा और प्रशासनिक प्रक्रिया की आड़ में मजदूरों को आधी दर से भुगतान किया जा रहा है।
यहां बताना जरूरी होगा कि कुछ दिनों पहले बीएमएस ट्रेड यूनियन ने इस विषय में प्रबंधन को पत्र लिखकर मजदूरों के बकाया वेतन भुगतान की मांग की थी। मजदूरों ने भी भुगतान में गड़बड़ी की शिकायत अधिकरियो से की थी। मजदूरों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर 2 माह का वेतन नहीं मिलने बात कही । इस मामले में जब एसईसीएल गेवरा के स्टाफ ऑफिसर से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि वे इस समय चार्ज पर नहीं है उन्हें इसकी जानकारी नहीं है । यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला करोड़ों रुपए के भुगतान में अनियमितता से जुड़ा हो सकता है।
कार्यकुशलता की शर्तें लेकिन अकुशल के हिसाब से भुगतान
मेंटेनेंस कार्य में लगे श्रमिक तकनीकी रूप से स्किल्ड वर्कर हैं, लेकिन उन्हें अनस्किल्ड श्रमिक की दर से मजदूरी दी जा रही है। इतना ही नहीं, बोनस और अवकाश (लीव) का भुगतान भी निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं किया जा रहा। केंद्रीय दर के बजाय राज्य सरकार की दर से भुगतान किए जाने की भी शिकायत है। सूत्रों का दावा है कि कई मामलों में मजदूरों के नाम पर भुगतान निकालकर कंपनी स्टाफ के नाम से राशि प्राप्त कर ली जाती है। इस पूरे मामले में 500 से अधिक मजदूर प्रभावित बताए जा रहे हैं, जिन्हें न तो पूरा मेहनताना मिल रहा है और न ही निर्धारित सुविधाएं।
वेतन खाते में लेकिन लौटानी पड़ती है बड़ी राशि
श्रमिकों के कल्याण को लेकर सरकारों की भूमिका योजनाएं बनाने, दावे करने और कुछ हद तक योजनाओं का क्रियान्वयन कराने की है। अधिकांश मामलों में श्रमिक कल्याण के दावे जमीन पर उतरने के बजाय कागजों तक ही सीमित हैं। कोरबा जिले में एसईसीएल के साथ-साथ एनटीपीसी और सीएसईबी में मामला कमोबेश एक जैसा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अधिकांश ठेकेदार मजदूरी का भुगतान निश्चित तौर पर श्रमिकों के खाते में करते हैं ताकि खुद को ईमानदार साबित किया जा सके। लेकिन यह काम शर्तों पर होता है। श्रमिकों को इसका एक निश्चित हिस्सा ठेकेदार या उसके व्यक्ति को शीघ्रता से लौटाना होता है ताकि सेवाएं जिंदा रह सके।






















