कनाडा में अपराधों से भारत का लेना-देना नहीं

नईदिल्ली २6 फरवरी ।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा से ठीक पहले ओटावा के कूटनीतिक रुख में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कनाडाई अधिकारी भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को प्राथमिकता दे रहे हैं। दरअसल, पिछले कुछथ सालों से भारतीय हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय दमन के गंभीर आरोपों के कारण दोनों देशों के बीच पैदा हुई कड़वाहट को पीछे छोड़ते हुए, अब कनाडाई अधिकारी व्यापारिक चर्चा के साथ आर्थिक साझेदारी को फिर से पटरी पर लाने के लिए बातचीत को प्रथमिकता दे रहे हैं। एक कनाडाई अधिकारी ने कहा, इन मुद्दों पर भारत सरकार के साथ हमारी परिपक्व और ठोस चर्चा होती है, और विदेशी हस्तक्षेप से बचने के लिए हमारे पास मजबूत सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। कनाडा के पीएम कार्नी की भारत यात्रा का उद्देश्य वर्षों से चली आ रही राजनयिक परेशानियों के बाद नई दिल्ली के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है। कार्नी के भारत आने से पहले वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कथित तौर पर मीडिया को बताया कि यदि सरकार को लगता कि भारत कनाडा की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप कर रहा है, तो कनाडा के प्रधानमंत्री संभवत: भारत यात्रा नहीं करते। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ओटावा ने अपना रुख कब बदलने का फैसला किया, लेकिन उन्होंने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के साथ वरिष्ठ अधिकारियों, मंत्री स्तरीय और नेता स्तरीय स्तर पर व्यवस्थित रूप से बातचीत की गई है। हमारे पास आगे की सार्थक चर्चा के लिए आधार मौजूद है। एक अन्य अधिकारी ने भी इस बात पर जोर दिया कि कनाडा अपने आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करता। उन्होंने कहा कि अगर ओटावा को लगता कि भारतीय सरकार द्वारा विदेशी हस्तक्षेप जारी है, तो मुझे नहीं लगता कि हमारे पीएम भारत यात्रा पर जाते।टोरंटो स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कनाडा में भारत का कनाडा में होने वाले हिंसक अपराधों से कोई लेना-देना नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आज यानी गुरुवार को भारत दौरे पर आ रहे हैं।
गौरतलब है कि कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी आज भारत यात्रा से शुरू करते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और बिगड़े संबंधों को सुधारने के प्रयासों को गति देना है। कार्नी की यह यात्रा भारत के साथ आर्थिक संबंधों को गहरा करने के प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
वर्तमान में भारत कनाडा का सातवां सबसे बड़ा वस्तु एवं सेवा व्यापार भागीदार है। कनाडाई सरकार के आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार 21 अरब डॉलर से अधिक है।

RO No. 13467/11