
पटना, २८ फरवरी ।
न्यायिक इतिहास में पहली बार पटना हाईकोर्ट 46 न्यायाधीशों के साथ कार्य करेगा। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 26 फरवरी 2026 को हुई बैठक में नौ अधिवक्ताओं को न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है ॥Historic Judicial Boost केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 46 हो जाएगी। हाईकोर्ट में जजों के कुल 53 स्वीकृत पद हैं। इस तरह अदालत अपनी कुल क्षमता के लगभग 87 प्रतिशत के साथ काम करेगी, जो अब तक का सबसे बड़ा कार्यरत बल होगा। कॉलेजियम द्वारा जिन अधिवक्ताओं को न्यायाधीश बनाए जाने की स्वीकृति दी गई है, उनमें मो. नदीम सिराज, रंजन कुमार झा, कुमार मनीष, संजीव कुमार, गिरिजिश कुमार, आलोक कुमार, राज कुमार, राणा विक्रम सिंह तथा विकास कुमार शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि पटना हाईकोर्ट में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियां पहले कभी नहीं देखी गईं। इसे संस्थान के इतिहास का ऐतिहासिक और अभूतपूर्व क्षण माना जा रहा है। वर्ष 2026 में तीन न्यायाधीश-मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू (4 जून 2026), न्यायाधीश नवनीत कुमार पांडेय (28 फरवरी 2026) तथा न्यायाधीश बिबेक चौधरी (31 अक्टूबर 2026) सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में नई नियुक्तियां न्यायिक निरंतरता के लिहाज से अहम मानी जा रही हैं। इससे अदालत के कामकाज पर सेवानिवृत्ति का प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा और सुनवाई की प्रक्रिया सुचारू बनी रहेगी।
इन नियुक्तियों पर बार और विधि जगत में हर्ष का माहौल है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा, बिहार स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा, महाधिवक्ता पी.के. शाही समेत कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इसे सकारात्मक कदम बताया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग पूर्ण क्षमता के साथ कार्य करने से लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी। इससे न्यायिक प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी तथा आम लोगों को समयबद्ध न्याय मिल सकेगा।



























