
गाजियाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले डेढ़ महीने से चली आ रही तनातनी के बाद अब ईरान और इजरायल के बीच शुरू हुए युद्ध ने गाजियाबाद के उद्यम और निर्यात कारोबार पर असर ड़ाला है।जनपद के उद्यमी इसे निर्यात-आयात के लिए बड़ा झटका बता रहे हैं। युद्ध के कारण ईरान सहित उसके रास्ते जुड़े करीब 18 देशों में होने वाला व्यापार पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। जिले से निर्यात होने वाला माल पहले मुंबई बंदरगाह भेजा जाता है, जहां से शिप के जरिए ईरान होते हुए इंडोनेशिया, मलेशिया, मिस्र, तुर्की सहित लगभग डेढ़ दर्जन देशों तक पहुंचता है।पहले ही अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते निर्यात घट चुका था, लेकिन अब युद्ध शुरू होने से इन देशों में फिलहाल निर्यात और आयात पर विपरीत असर पडऩा तय है।उद्यमियों के अनुसार, इससे जिले के इंजीनियरिंग गुड्स, टैक्सटाइल, मांस और फूड एग्रो प्रोडक्ट उद्योग को भारी नुकसान होने का अनुमान है। निर्यात में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। पहले से ही चार वर्षों से चल रहे यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण निर्यात कमजोर पड़ा है। ऐसे में यह नया संकट उद्योगों की कमर तोड़ सकता है। ईरान और इजरायल युद्ध सिर्फ दो देशों के बीच सिमटकर रहने वाला नहीं है। इससे पूरे मिडिल ईस्ट के देशों को होने वाला करीब 40 प्रतिशत आयात-निर्यात प्रभावित होगा। इससे भुगतान और माल की सप्लाई बाधित होगी। इसका असर आम वस्तुओं पर भी पड़ेगा, जिससे महंगाई में बढ़ोतरी हो सकती है। नीरज सिंघल, निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष आइआइएयुद्ध अगर बढ़ा तो इसका असर पूरे विश्व में दिखाई दिसे आसमानी और समुद्री मार्ग बंद होने से सप्लाई चेन बाधित होगी। यह बेहद ही मुश्किल वक्त है अभी शनिवार और रविवार को मार्केट बंद होने पर इसका असर नहीं दिखा है, लेकिन सोमवार में मार्केट खुलने पर कमोडिटी और बिजनेस पर इसका असर दिखाई देगा। अभी से चिप और आइसी के दाम दो से तीन गुणा तक बढ़ा दिए गए। संजीव सचदेवा, महासचिव इंडस्ट्रियल एरिया मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशनयुद्ध की स्थिति में अभी फ्लाइट कैंसिल हुई हैं। आने वाले समय में इसका असर समुद्री मार्ग पर भी पड़ेगा। फ्लाइट कैंसिल होने से ही इलेक्ट्रानिक कंपोनेंट के दाम बढऩे लगे हैं। समुद्री रास्ते बंद होने पर इसके दाम आसमान छू लेंगे।
लागत कई गुना हो जाएगी, जिससे महंगाई और मैटेरियल कास्ट में भी वृद्धि होगी। – विकास खंड़ेलवाल, उद्यमीयदि यह युद्ध भी यूक्रेन-रूस की तरह लंबा चला तो उत्पादन से लेकर निर्यात तक भारी गिरावट आएगी। अंतरराष्ट्रीय युद्ध की आंच अब गाजियाबाद के उद्योगों तक भी पहुंचेगी। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो जिले की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पडऩा तय है। – राकेश अनेजा, उद्यमी

















