
नईदिल्ली, 0३ मार्च ।
राष्ट्रीय राजधानी के परिवहन नियोजन को लेकर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट 2026 रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बुनियादी ढांचा मोटर वाहनों के हिसाब से विकसित किया जा रहा है, जबकि असलियत में शहर की एक बहुत छोटी आबादी ही चौपहिया वाहनों का इस्तेमाल करती है। सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने बताया कि दिल्ली में महज 6.4 प्रतिशत लोग कारों का उपयोग करते हैं। इसके विपरीत, 38.9 प्रतिशत लोग आज भी नान-मोटराइज्ड व्हीकल (साइकिल या पैदल) का सहारा लेते हैं। विडंबना यह है कि सडक़ों का 90 प्रतिशत हिस्सा कारें घेरती हैं, जबकि साइकिल सवारों और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित फुटपाथ या लेन का अभाव है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बड़ी आबादी पैदल या साइकिल से चलती है, तो शहर की पूरी प्लानिंग केवल फ्लाईओवर एवं सडक़ों को चौड़ा करने तक ही सीमित क्यों है। दिल्ली में फुटपाथ और साइकिल ट्रैक की स्थिति मिश्रित है। लुटियंस दिल्ली और द्वारका जैसे इलाकों में सुव्यवस्थित ट्रैक हैं जबकि कई मुख्य सडक़ों पर अतिक्रमण और रखरखाव की कमी देखी जाती है। नई परियोजनाएं (यमुना रिवर फ्रंट) यमुना के पश्चिमी किनारे पर 21 किमी और पूर्वी तरफ 30 किमी का नया और सुव्यवस्थित साइकिल ट्रैक विकसित किया जा रहा है। यह वजीराबाद से एनएच -24 होते हुए कालिंदी कुंज तक होगा, जिसे अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है। फुटपाथों का सुधार और निरंतरता सुनिश्चित करनी होगी। सुरक्षित सडक़ पार करने की सुविधाएं, जैसे ज़ेब्रा क्रासिंग, लाइटिंग और ट्रैफिक सिग्नल, बढ़ाए जाने चाहिए। महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नीतियां बनाई जाएं। फुटपाथ से पार्किंग को हटाया जाए और उन्हें अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए।




















