
नई दिल्ली। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि पति या पत्नी को खंडन का मौका दिए बिना केवल वाट्सएप चैट के आधार पर कथित क्रूरता के लिए तलाक नहीं दिया जा सकता है।
जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की पीठ ने पिछले सप्ताह नासिक जिला परिवार न्यायालय द्वारा पारित आदेश को रद कर दिया, जिसमें क्रूरता के आधार पर अपनी पत्नी से तलाक की मांग करने वाले एक व्यक्ति द्वारा दायर आवेदन को स्वीकार कर लिया गया था।
महिला ने पारिवार न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें दावा किया गया कि यह आदेश एकतरफा पारित किया गया है और उसे अपने तर्क प्रस्तुत करने का अवसर नहीं दिया गया।
पारिवार न्यायालय ने मई 2025 के अपने आदेश में उस व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत वाट्सएप चैट पर भरोसा किया, जिसमें महिला ने मांग की थी कि वे नासिक से पुणे चले जाएं और अलग रहने लगें और जिसमें उसने कथित तौर पर अपनी सास और ननद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं।


































