
ओडि़शा, 0६ मार्च ।
ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्नजडि़त नीलचक्र पर लहरा रहे पतितपावन बाना (पवित्र ध्वज) पर गुरुवार को एक बाज(गरुड़) के बैठने की घटना ने करोड़ों श्रद्धालुओं को स्तब्ध कर दिया है।सदियों से चली आ रही इस अटल मान्यता के बीच कि श्रीमदिर के शिखर के ऊपर से कोई पक्षी नहीं उड़ता, इस दृश्य ने आस्था और आशंकाओं के बीच एक भीषण बहस छेड़ दी है। इसे कोई युग परिवर्तन का संकेत मान रहा है, तो कोई इसे महाविनाश की पूर्व सूचना। भक्तों का एक बड़ा वर्ग इस घटना को सकारात्मक दृष्टि से देख रहा है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, बाज को भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ माना जाता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि कलियुग के बढ़ते प्रभाव के बीच स्वयं गरुड़ देव भगवान जगन्नाथ की रक्षा के लिए नीलचक्र पर विराजमान हुए हैं। पुरी के कई मठों में इसे दिव्य सुरक्षा चक्र के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, भविष्यवाणियों पर शोध करने वालों के बीच आज की यह घटना चिंता का विषय बन गई है। ओडिशा की प्रसिद्ध भविष्य मालिका (संत अच्युतानंद द्वारा रचित) के अनुसार:-अशुभ संकेत: मंदिर के ध्वज पर हिंसक पक्षी का बैठना या ध्वज का गिरना किसी बड़े विश्व युद्ध, प्राकृतिक आपदा या सत्ता परिवर्तन का सूचक माना जाता है।
अतीत का साया: भक्त 2020 की उस घटना को याद कर सहमे हुए हैं, जब मंदिर के ध्वज में आग लग गई थी और उसके तुरंत बाद कोरोना जैसी महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था। श्रीजगन्नाथ मंदिर को रहस्यों की भूमि माना जाता है। यहाँ का विज्ञान भी उस मान्यता के सामने नतमस्तक है कि मंदिर के गुंबद के ऊपर से पक्षी या विमान नहीं गुजरते। ऐसे में बाज का ध्वज पर आकर बैठना और काफी देर तक टिके रहना, मंदिर की पारंपरिक सुरक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा के नियमों के विरुद्ध माना जा रहा है। मदिर प्रशासन ने भक्तों से किसी भी तरह की अफवाह से बचने की अपील की है। सेवायतों का कहना है कि यह एक प्राकृतिक घटना हो सकती है जहाँ पक्षी थकावट के कारण विश्राम के लिए वहां बैठ गया हो। हालांकि, मंदिर की परंपरा के अनुसार, ध्वज के साथ होने वाली किसी भी असामान्य गतिविधि के बाद शांति पूजा का विधान है, जिसकी तैयारी की जा रही है। ध्वज का विज्ञान: मंदिर का ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है।
पक्षियों का वर्जित क्षेत्र: यहाँ के शिखर के ऊपर पक्षी नहीं उड़ते, जो आज की घटना को और अधिक रहस्यमयी बनाता है। ध्वज परिवर्तन: प्रतिदिन एक सेवायत 214 फीट की ऊंचाई पर चढक़र हाथ से ध्वज बदलता है।क्या यह वास्तव में कलियुग के अंत और सत्ययुग के आगमन का संकेत है, जैसा कि भविष्य मालिका में वर्णित है।
















