
दुबई, 0८ मार्च ।
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद हो जाने से खाड़ी क्षेत्र में हजारों अंतरराष्ट्रीय यात्री फंस गए हैं। हालात ऐसे बने कि कम से कम छह बड़े क्रुज जहाजों पर करीब 15 हजार यात्री कई दिनों से खाड़ी देशों में अटके हुए हैं। सरकारी निकासी प्रक्रिया धीमी पडऩे के बीच स्विट्जरलैंड स्थित दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी क्रुज कंपनी एमएससी ने आगे बढक़र अपने यात्रियों को सुरक्षित घर पहुंचाने की पहल शुरू कर दी है। कंपनी ने दुबई में फंसे अपने जहाज एमएससी यूरिबिया के यात्रियों को निकालने के लिए अब तक सात चार्टर्ड फ्लाइट्स की व्यवस्था की है और कई कमर्शियल विमानों में सीटों के ब्लॉक खरीदे हैं। इसके जरिए 1500 से अधिक यात्रियों को दुबई से उनके देशों तक भेजा जा चुका है। कंपनी के कार्यकारी चेयरमैन पियरफ्रांसेस्को वागो ने कहा कि कंपनी की टीमें दुनिया भर में लगातार काम कर रही हैं ताकि सभी यात्रियों को सुरक्षित और जल्द घर पहुंचाया जा सके।6,327 यात्रियों की क्षमता वाला एमएससी यूरिबिया 27 फरवरी को दुबई पहुंचा था। इसके ठीक अगले दिन ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात की ओर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे। इसके बाद दुबई प्रशासन ने मोबाइल अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों में रहने की चेतावनी दी। हालांकि अधिकतर हमलों को वायु रक्षा प्रणाली ने रोक दिया, लेकिन जहाज पर मौजूद यात्रियों ने डेक से आसमान में आग के गोले और धमाके होते देखे और कई दिनों तक डर और अनिश्चितता में रहे। एमएससी के अनुसार अधिकांश यात्री यूरोप भेजे जा रहे हैं। एक चार्टर्ड उड़ान में 280 ब्रिटिश और आयरिश यात्री लंदन पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ अमेरिकी यात्री दुबई से डैलस के लिए रवाना हुए। बाकी अमेरिकी यात्रियों को भी शनिवार तक निकालने की योजना है।दुबई में सेलेस्टियल डिस्कवरी और अरोया मनारा जहाज खड़े हैं, जबकि सेलेस्टियल जर्नी और जर्मनी का टीयूआइ मीन शिफ-5 कतर की राजधानी दोहा में रुके हुए हैं। वहीं टीयूआइ मीन शिफ-4 अबू धाबी में खड़ा है। दोहा में सेलेस्टियल जर्नी पर फंसे अमेरिकी यात्री एडविन क्वान ने बताया कि उनका जहाज दुबई जाने वाला था, लेकिन संघर्ष शुरू होने के बाद वह कई दिनों से वहीं रुका है।




















