आरोपी की जमानत के लिए फर्जी गवाह खड़ा हुआ कोर्ट में, जुर्म दर्ज

जांजगीर। विशेष न्यायालय में विचाराधीन एक प्रकरण में झूठी गवाही देने के मामले को गंभीर मानते हुए अदालत ने दो साक्षियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने तीजराम यादव और शंभूनाथ यादव के विरुद्ध परिवाद प्रेषित कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जांजगीर की अदालत में मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।
लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर ने बताया कि मामला औषधि निरीक्षक सुमित सिंह परिहार द्वारा दर्ज प्रकरण शासन बनाम मनीष पुरान विश्वास से जुड़ा है। यह प्रकरण औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के प्रावधानों के उल्लंघन से संबंधित था। विशेष न्यायालय ने 25 नवंबर 2025 को फैसला सुनाते हुए आरोपी मनीष पुरान विश्वास को दोषी ठहराया था। अदालत ने उसे धारा 18ए सहपठित धारा 28 के तहत 6 माह के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। जांच के दौरान सामने आया था कि आरोपी मनीष पुरान विश्वास को तीजराम यादव ने अपना मकान किराए पर दिया था, जहां वह क्लीनिक संचालित कर रहा था। जांच के समय पंचनामा कार्रवाई के दौरान तीजराम यादव ने लिखित रूप से स्वीकार किया था कि उसने दुकान लगभग आठ महीने पहले एक हजार रुपए मासिक किराये पर दी थी। हालांकि, 25 जून 2025 को विशेष न्यायालय में शपथ पर दर्ज बयान में तीजराम यादव ने अपने हस्ताक्षर तो स्वीकार किए, लेकिन दुकान किराए पर देने से इनकार कर दिया। इसी तरह 26 अगस्त 2025 को शंभूनाथ यादव ने भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर स्वीकार किए, लेकिन क्लीनिक संचालन से जुड़े अहम तथ्यों से मुकर गए। न्यायालय ने दोनों के बयान को मिथ्या साक्ष्य मानते हुए इसे न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास बताया और तीजराम यादव (51) व शंभूनाथ यादव (36), निवासी तिलई, तहसील अकलतरा, जिला जांजगीर-चांपा के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

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