मिडिल ईस्ट संकट की मार: पाकिस्तान में ‘फ्यूल इमरजेंसी’, पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से मचा हाहाकार

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध के तनाव ने अब दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। इसकी सबसे भीषण मार पाकिस्तान पर पड़ी है, जहां ईंधन संकट के कारण हाहाकार मच गया है। खाड़ी देशों से होने वाली तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका के बीच पाकिस्तान सरकार ने देश में ‘फ्यूल इमरजेंसी’ जैसे कड़े कदम उठाए हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

सरकार ने जनता पर महंगाई का बड़ा बोझ डालते हुए पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस वृद्धि के बाद नई दरें इस प्रकार हैं डीजल: 335.86 रुपये/लीटर…पेट्रोल: 321.17 रुपये/लीटर…

विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान का अधिकांश तेल सऊदी अरब और यूएई से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है। युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग पर बढ़ते खतरे ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिससे कीमतें आसमान छू रही हैं।

सरकार ने घोषित किए ‘किफायती’ नियम: मंत्रियों के वेतन में कटौती

ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए शहबाज शरीफ सरकार ने बेहद कड़े और अभूतपूर्व फैसलों की घोषणा की है:

सरकारी गाड़ियों पर पाबंदी: देश की 60% सरकारी गाड़ियां अगले दो महीनों तक सड़कों पर नहीं उतरेंगी। साथ ही सरकारी अधिकारियों के फ्यूल अलाउंस में 50% की कटौती कर दी गई है।
वेतन में कटौती: संकट की घड़ी में एकजुटता दिखाने के लिए सभी मंत्री दो महीने तक वेतन नहीं लेंगे, जबकि सांसदों के वेतन में 25% की कटौती की गई है।वेतन में कटौती: संकट की घड़ी में एकजुटता दिखाने के लिए सभी मंत्री दो महीने तक वेतन नहीं लेंगे, जबकि सांसदों के वेतन में 25% की कटौती की गई है।
वर्किंग कल्चर में बदलाव: सरकारी दफ्तर अब हफ्ते में सिर्फ 4 दिन खुलेंगे। बाकी समय कर्मचारी ‘वर्क फ्रॉम होम’ करेंगे ताकि दफ्तरों का बिजली और परिवहन खर्च कम किया जा सके।
खर्चों पर पूर्ण रोक: सरकार ने नई गाड़ियों की खरीद, अधिकारियों की विदेश यात्राओं और भव्य सरकारी डिनर या इफ्तार पार्टियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।

RO No. 13467/11