
नई दिल्ली। प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में भारत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। सर गंगा राम अस्पताल के डाक्टरों ने गंभीर एशरमैन सिंड्रोम से पीडि़त दो महिलाओं में गर्भ नाल से प्राप्त स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग कर सफल प्रसव कराए हैं।
यह अध्ययन अस्पताल के सेंटर आफ आइवीएफ एंड ह्यूमन रिप्रोडक्शन और जैव प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान विभाग के सहयोग से चल रहे क्लीनिकल ट्रायल का हिस्सा है। इस तकनीक में नाल के व्हार्टन जेली से प्राप्त मेसेनकाइमल स्टेम सेल का उपयोग किया गया, जिन्हें हिस्टेरोस्कोपी की सहायता से सीधे गर्भाशय की भीतरी परत के नीचे इंजेक्ट किया गया। एशरमैन सिंड्रोम में गर्भाशय के भीतर गंभीर चिपकाव बन जाते हैं, जिससे गर्भाशय की गुहा आंशिक या पूरी तरह अवरुद्ध हो सकती है। यह समस्या अक्सर बार-बार गर्भाशय की सफाई, संक्रमण या सर्जरी के बाद होती है और गंभीर मामलों में गर्भधारण लगभग असंभव हो जाता है।
डाक्टरों के अनुसार स्टेम सेल को गर्भाशय की बेसल परत में इंजेक्ट किया गया, जो गर्भाशय की परत के पुनर्निर्माण के लिए जिम्मेदार होती है। इस प्रक्रिया में पहले की कई अंतरराष्ट्रीय तकनीकों की तरह किसी बायोमैटेरियल या स्कैफोल्ड का उपयोग नहीं किया गया, जिससे यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल और अधिक लक्षित बन गई।क्लीनिकल ट्रायल में अब तक 10 मरीजों को शामिल किया गया है।






























