चीन का नया ‘सोलर पैनल ट्रैप’, ट्रंप सरकार ने लिया एक्शन, भारतीय कंपनियां रडार पर! ऐसे बचेगा भारत

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की सरकार ने चीन की कथित साजिश को निशाना बनाते हुए एक नया ट्रेड वार छेड़ दिया है। मार्च 2026 में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने ट्रेड एक्ट 1974 की सेक्शन 301 के तहत दो बड़ी जांच शुरू कीं। एक जांच 16 देशों की औद्योगिक नीतियों पर है, जो अतिरिक्त उत्पादन क्षमता पैदा कर अमेरिकी उद्योगों को नुकसान पहुंचा रही हैं। दूसरी जांच 60 देशों पर है, जहां जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से बनी वस्तुओं को वैश्विक व्यापार में रोकने में असफलता की पड़ताल हो रही है। दोनों जांचों में भारत का नाम साफ तौर पर शामिल है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि चीन का ‘सोलर पैनल ट्रैप’ अब भारतीय कंपनियों को भी लपेटे में ले रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल क्षेत्रों में चीन पर इतना निर्भर है कि अमेरिकी जांच का असर सीधे भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है।

ट्रंप का चीन पर सीधा धावा

यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। उसके बाद ट्रंप ने सेक्शन 122 के तहत अस्थायी 10% टैरिफ लगा दिया। अब कानूनी रास्ते से लीवरेज बनाने के लिए USTR जांच का हथियार इस्तेमाल कर रहा है। GTRI ने कहा, “वाशिंगटन अब जांच के जरिए व्यापार वार्ताओं में दबाव बनाना चाहता है।”

भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा: चीन का सोलर पैनल ट्रैप?

भारत में बॉन्डेड लेबर सिस्टम (एबोलिशन) एक्ट 1976 के तहत जबरन श्रम पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन समस्या यह है कि भारतीय निर्यात चीन के इंटरमीडिएट इनपुट्स पर टिका है। GTRI रिपोर्ट में साफ लिखा है:सोलर पैनल: अमेरिका को भारत का सबसे बड़ा बाजार है, लेकिन भारतीय सोलर पैनल निर्यात चीनी पॉलीसिलिकॉन और सोलर सेल्स पर निर्भर है। शिनजियांग में कथित जबरन श्रम (लेबर ट्रांसफर प्रोग्राम) के आरोप इन सप्लाई चेन पर लगे हैं।

भारत ने अभी तक ‘काट’ कैसे निकाली?

अभी तक भारत सीधे जबरन श्रम के आरोपों से बचता रहा है क्योंकि देश में खुद ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं चलता। लेकिन GTRI चेतावती दे रहा है कि अगर भारत चीन पर निर्भरता कम नहीं करता तो लपेटे में फंस सकता है। रिपोर्ट कहती है कि भारतीय कंपनियां अगर सप्लाई चेन की ट्रेसेबिलिटी मजबूत करें, वैकल्पिक स्रोत (जैसे वियतनाम, ताइवान या घरेलू उत्पादन) बढ़ाएं और अमेरिका को स्पष्ट प्रमाण दें, तो इस ट्रैप से बच सकते हैं। ट्रंप का यह कदम चीन की साजिश को बेनकाब करने वाला है, लेकिन भारत को भी अपनी रणनीति बदलनी होगी। GTRI की रिपोर्ट साफ संकेत दे रही है या तो चीन की सप्लाई चेन से दूरी बनाओ, या अमेरिकी बाजार से हाथ धो बैठो। भारतीय निर्यातकों के लिए यह घंटी है। सोलर मिशन और मेक इन इंडिया को मजबूत करने के साथ-साथ सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन अब राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन गया है।

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