विधायक और लोगों के धरना प्रदर्शन के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों की सडक़ें अभी भी नहीं उबर सकी बदहाली से

जांजगीर। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों को शहर से जोडऩे वाली जर्वे-पीथमपुर मार्ग की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही थी। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी हुई डामर की परतों के कारण वाहन चालक परेशान थे। ग्रामीण लंबे समय से सडक़ निर्माण की मांग कर रहे थे। अब खराब सडक़ की समस्या दूर होने वाली है, निर्माण के लिए वित्तीय मंजूरी मिल गई है।
सात किलोमीटर सडक़ निर्माण के लिए लगभग 27 करोड़ 78 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। दैनिक भास्कर ने कई बार बदहाल सडक़ के मुद्दे को उठाया था। इसके साथ ही ग्रामीणों ने सडक़ बनवाने के लिए जाम और धरना-प्रदर्शन भी किया था। जांजगीर-चांपा के विधायक ब्यास कश्यप के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग ने सडक़ों की मरम्मत और चौड़ीकरण के लिए करोड़ों रुपए का बजट बनाकर प्रस्ताव भेजा, लेकिन मंजूरी नहीं मिली थी। 21 फरवरी को मंजूरी नहीं मिलने पर दैनिक भास्कर ने विकास की रफ्तार तो देखिए शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इसके बाद निर्माण कार्य को मंजूरी मिल गई।
सडक़ चौड़ी करने हटाया जा सकता है अतिक्रमण शासन से मंजूरी मिलने के बाद विभाग द्वारा निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद निर्माण एजेंसी को कार्य सौंपा जाएगा। सडक़ का चौड़ीकरण भी किया जाएगा, इसलिए मार्ग में आने वाले अतिक्रमणों को हटाया जा सकता है। निर्माण कार्य शुरू होने में लगभग 2 से 3 माह का समय लग सकता है।इन सडक़ों को बनाने के लिए भेजा गया है प्रस्ताव ग्रामीण क्षेत्रों को जिला मुख्यालय से जोडऩे वाली जांजगीर-पामगढ़, जांजगीर-केरा, नैला, पंतोरा, रोगदा, बिरगहनी और जांजगीर-बलौदा सहित अन्य सडक़ों की मरम्मत और चौड़ीकरण के लिए करीब 300 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। इसमें कई सडक़ों को मंजूरी नहीं मिली है।दो बार जर्वे में ग्रामीणों के चक्काजाम किया शहर से जर्वे-पिसौद होकर पीथमपुर जाने वाली सडक़ पर बिछाई गई डामर की परत पूरी तरह उखड़ चुकी है। जर्वे में नहर के पास, पंचायत भवन, प्राइमरी स्कूल, बस्ती के आस-पास सडक़ काफी खराब है। आरटीओ कार्यालय से लेकर पीथमपुर मंदिर पहुंचने तक करीब 7 किमी के दायरे में गड्ढे ही गड्ढे हो गए हैं। ग्रामीणों ने सडक़ बनवाने की मांग को तीन साल के भीतर दो बार चक्काजाम, प्रदर्शन किया। तब जाकर मंजूरी मिली है।

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