गैस संकट के बीच केंद्रीय मंत्री ने की शशि थरूर की तारीफ, कहा- बड़े नेताओं को उनसे सीखना चाहिए

रांची 21 मार्च। ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते भारत में गैस संकट पैदा हो गया है। इसको लेकर देश की राजनीति में वार-पलटवार को दौर जारी है। इस बीच भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि हर चीज का विरोध नहीं होना चाहिए। शशि थरूर जरूर कांग्रेस पार्टी के सांसद हैं, लेकिन जब भी देश को जरूरत पड़ी है, वे हमेशा देश के साथ खड़े दिखे हैं। शशि थरूर सच्चे देशभक्त हैं। राहुल गांधी उनसे सीखना चाहिए। संजय सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की वजह से ही देश में अमन-चैन है। कहीं डीजल-पेट्रोल और गैस की कमी नहीं है। कहीं कोई घबड़ाहट की स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि घबराहट की स्थिति कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने बनाने का प्रयास किया। कांग्रेस हर चीज में भारत का विरोध करते हैं। कभी ऑपरेशन सिंदूर, कभी इकोनॉमी तो कभी सर्जिकल स्ट्राइक पर प्रश्न चिन्ह उठाते हैं। उन्होंने कहा, मैं धन्यवाद करूंगा शशि थरूर का और उनके पार्टी के बड़े नेताओं को उनसे सीखना चाहिए। वे देश के एक जिम्मेदार नागरिक हैं, ये बात शशि थरूर ने साबित की है। शशि थरूर ने एक लेख में भारत की चुप्पी को जिम्मेदार कूटनीति के रूप में सही ठहराया, ना कि नैतिक आत्मसमर्पण के रूप में जैसा कि कई लोगों ने दावा किया।विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति का उल्लेख किया और विपक्ष के उस दावे को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि भारत शक्तिशाली अमेरिका-इजरायल धुरी की ओर झुक रहा है। थरूर ने लेख में लिखा, भारत की कूटनीति हमेशा सिद्धांत और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाने के बारे में रही है। जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति नैतिक स्थिति लेने से इंकार यह इस बात की स्वीकृति थी कि भारत की संप्रभुता और अस्तित्व शीत युद्ध की शत्रुताओं में उलझने से बचने पर निर्भर करता है।
एक बढ़ते बहुधु्रवीय विश्व की वास्तविकताओं पर उन्होंने लिखा, भारत मल्टी-अलाइनमेंट का अभ्यास करता है। ईरान पर युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत न्यायसंगत नहीं है, लेकिन भारत की चुप्पी उस युद्ध का समर्थन नहीं है, बल्कि यह इस बात की स्वीकृति है कि हमारे राष्ट्रीय हितों के लिए विवेक की आवश्यकता है, न कि दिखावे की।

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