रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में होने वाले नगरीय निकायों के चुनाव में बैलेट पेपर ;मतपत्रद्ध से वोट डाले जाएंगे. राज्य में इन चुनावों का समय करीब आने के साथ ही इस बात की अटकलें तेज हो रही हैं। इसी बीच सरकार के मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा है कि नगरीय निकाय चुनाव बैलेट से हो सकते हैं। उन्होंने कहा है कि हम भी ईवीएम से ये चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं. लेकिन इस बारे में सरकार को निर्णय लेना होगा। दरअसल राज्य की सत्ताधारी बनी कांग्रेस पार्टी ईवीएम से होने वाले चुनावों में हर बार गड़बड़ी की आशंका जताती रही है। कांग्रेस जब तक विपक्ष में रही तब तक ईवीएम को लेकर पार्टी का यही रूख रहा है, लेकिन अब जबकि कांग्रेस सत्ता में है और उसके अधिकार में यह बात शामिल है कि वह चाहे तो ईवीएम को दरकिनार करने बैलेट से चुनाव करा सकती है। लिहाजा ऐसी संभावना बनी हुई है कि सरकार इस मामले को लेकर कोई फैसला करे, लेकिन फैसले से पहले मंत्री श्री सिंहदेव का यह बयान काफी मायने रखता है।

छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव के लिए आरक्षण की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक ये साफ नहीं है कि ये चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे या बैलेट पेपर ;मतपत्रद्ध के माध्यम से वोट डाले जाएंगे। राज्य में 2018 में कांग्रेस नेतृत्व की सरकार बनने के बाद पहली बार हो रहे इन चुनावों को लेकर इस बात का संशय इसलिए है कि कांग्रेस के लोग ईवीएम के पक्ष में नहीं है, दूसरी ओर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा यह चुनाव ईवीएम से कराने की पक्षधर है। दिसंबर में नगरीय निकायों के चुनाव होने हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की देखरेख में चुनाव से संबंधित प्रक्रियाएं संचालित हो रही हैं। राज्य सरकार ने नगरीय प्रशासन विभाग ने बुधवार को प्रदेश के सभी नगर निगमों, पालिकाओं तथा नगर पंचायतों के मेयर तथा अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण का काम भी पूरा कर लिया है। निकायों के वार्डों का आरक्षण भी किया जा चुका है।

भाजपा ईवीएम की पक्षधर छत्तीसगढ़ भाजपा चाहती है कि नगरीय निकायों के चुनाव ईवीएम से हों। पार्टी के चुनाव विधिक संयोजक नरेश गुप्ता ये बात कह चुके हैं कि हमने राज्य निर्वाचन आयोग को लिखित में दिया है कि ये चुनाव ईवीएम से होने चाहिए। कांग्रेस क्या चाहती है साफ नहीं नगरीय चुनाव में मतदान किस तरीके से हो इसे लेकर कांग्रेस का रुख साफ नहीं है। हालांकि कुछ समय पहले तक कांग्रेस पक्ष की ओर से ये बात सुनने में आई कि पार्टी बैलेट पेपर से चुनाव कराने के पक्ष में है, लेकिन आधिकारिक रूप से पार्टी ने इस बारे में कुछ नहीं कहा है। इस मामले को लेकर कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि ये बात आयोग पर निर्भर करती है कि चुनाव बैलेट से या ईवीएम से। ईवीएम से चुनाव कराना आसान छत्तीसगढ़ में राज्य निर्वाचन आयुक्त रह चुके सुशील त्रिवेदी का कहना है कि बैलेट की अपेक्षा ईवीएम से चुनाव कराना आसान है। इस मशीन से चुनाव होने से कागज बचता है, इससे पर्यावरण की रक्षा होती है। ईवीएम से होने वाले चुनाव में मतदान व मतगणना जल्दी हो जाती है तथा अवैध मतों की संख्या कम होती है। इसके विपरीत पंचायतों के चुनाव बैलेट से करना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि इन चुनावों में एक मतदाता वार्ड के लिए चार वोट देता है। वार्ड के लिए सरपंच, जनपद और जिला पंचायत के लिए। यही कारण है कि इन चुनावों में ईवीएम से कराना कठिन होता है। हालांकि इन चुनावों में भी ईवीएम से वोटिंग कराई जा सकती है।