जांजगीर-चांपा। बुधवार की शाम सड़क दुर्घटना में सिवनी के युवक की मौत के बाद दूसरे दिन गुरुवार को उनके परिजन व ग्रामीणों ने सिवनी में बलौदा- नैला रोड में सुबह 7 बजे से चक्काजाम कर दिया। परिजन का आरोप था कि घटना के बाद पुलिस ने परिजन को जानकारी दिए बिना ही शव को हटा दिया और घटनास्थल की सफाई करा दी। उनका यह भी आरोप था कि वे बेटे के शव को रात तक अस्पताल में ढूंढते रहे। आंदोलनकारी पांच लाख रुपए मुआवजे की मांग कर रहे थे। 25 हजार मुआवजा दिया गया तब करीब पांच घंटे के चक्काजाम समाप्त हुआ।
नैला सिवनी निवासी युवक कन्हैया बरेठ (26 वर्ष) पिता महाबीर बरेठ जांजगीर- नैला रोड की वीआईपी सिटी में वाचमैन था। वह कॉलोनी में ही रहता था, लेकिन बुधवार की सुबह वह अपने गांव गया था। शाम को अपनी ड्यूटी के लिए वह वापस जांजगीर लौट रहा था। उसने अपने जीजा को बाइक लेकर बुलाया था। बलौदा फाटक बंद होने पर वह फाटक पार कर स्टेशन की ओर आ गया, इसी दौरान फाटक खुल गया तथा बलौदा की ओर जा रहे अज्ञात वाहन के चालक ने कन्हैया को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस ने सूचना मिलने पर तुरंत ही शव को मौके से हटा दिया था। इससे आक्रोशित होकर ग्रामीणों ने आंदोलन किया। सुबह से ही ग्रामीण आक्रोशित हो गए थे। 7 बजे ही रामसरकार पांडेय चौक में ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया। धीरे धीरे भीड़ बढ़ती गई तो बलौदा- नैला रोड में बांस का बैरियर लगाकर रोड जाम कर दिया गया। दोनों ओर की गाडिय़ां थम गई। सूचना पर पुलिस के साथ ही एसडीएम मेनका प्रधान, तहसीलदार प्रकाश साहू, नायब तहसीलदार सीता शुक्ला सहित अन्य पहुंचे। समझाइश देने की कोशिश की, पर ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला. बिना अनुमति रास्ता रोकना धारा 341, बलवा धारा 147, 148, गाली गलौज व मारने की धमकी देना धारा 294, 506, सरकारी काम में बाधा धारा 186, 353 में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कमल साव, शैलेंद्र पांडेय,अरूण कुमारू, राजकुमार यादव, कृष्ण कुमार बरेठ, अशोक बरेठ, रामगोपाल को गिरफ्तार किया है। आक्रोशित ग्रामीणों ने चक्काजाम के बाद मौके पर खड़े वाहनों पर भी तोडफ़ोड़ करने का प्रयास किया। वाहनों पर पथराव व डंडों से मारकर कांच को तोड़कर नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। दोपहर करीब 12 बजे एएसपी श्रीमती मधुलिका सिंह मौके पर पहुंचीं। उन्होंने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चेतावनी दी। दुकानों, को बंद कराया गया। आंदोलनकारियों से बात की, समझाइश दी इस पर भी नहीं माने तो सड़क छोडऩे की चेतावनी दी। सड़क पर खड़े लोगों के फोटोग्राफ्स लेने, नाम नोट करने का निर्देश दिया तब कहीं लोग पीछे हटते गए। इसके बाद पुलिस के जवानों ने सड़क खाली कराई।