जांजगीर-चांपा। जिले में 19 हजार 835 मध्यम कुपोषित तथा 3 हजार 581 गंभीर कुपोषित बच्चे हैं। इन्हें कुपोषण से मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्रयास किया जा रहा है। यह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ड्रीम प्रोजेक्ट में से भी एक है। कुपोषित बच्चों व एनिमिया पीडि़त महिलाओं के इलाज के लिए जिले में तीन पोषण पुनर्वास केंद्र चलाए जा रहे हैं। यहां ऐसे लोगों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के दावे के अनुसार पिछले छह माह में 1720 कुपोषित बच्चों को इससे छुटकारा मिला है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार बच्चों और महिलाओं की सेहत एवं तंदुरूस्ती के लिए कई कवायद कर रही है। इन्हीं में से एक अहम् योजना मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत की गई है। इस योजना के तहत गंभीर कुपोषित बच्चों और एनिमिया पीडि़त महिलाओं का उपचार किया जा रहा है।
खानपान में लापरवाही से एनिमिया व बच्चे कुपोषित – डॉ. अनिल जगत के अनुसार संतुलित मात्रा में पौष्टिक आहार ना मिल पाने से शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इससे शरीर में विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज तत्वों जैसे आयोडीन, आयरन, फास्फोरस, कैल्शियम की पूर्ति नहीं हो पाती। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है। इसके कारण कई अन्य बीमारियों का शिकार बन जाते हैं। कुपोषण कई बार मातृ एवं शिशु मृत्यु का कारण बनता है।