अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद पर शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में सुबह 10.30 बजे होने वाली सुनवायी शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच मामले पर फैसला सुना रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सर्व सम्मति से मामले पर हिंदुओं के पक्ष में फैसला दिया है। मुस्लिमों को वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया गया है। पांच एकड़ जमीन मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में ही देने के निर्देश दिए गए हैं। जबकि जमीन पर रामलला का दावा माना है। हालांकि जमीन का अधिकार ट्रस्ट को सौंपने के निर्देश दिए हैं। तीन माह में केंद्र को राम जन्मभूमि ट्रस्ट बनाने के निर्देश दिए हैं। पक्षकार गोपाल विशारद को पूजा करने का अधिकार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या राम की जन्मभूमि है इसको लेकर कोई विवाद ही नहीं है। मुस्लिम पक्ष जमीन पर अपना अधिकार साबित नहीं कर पाया है। अंग्रेजों के आने के बाद 18वीं सदी तक नमाज के कोई सबूत नहीं। हालांकि 1949 तक प्रत्येक शुक्रवार को वहां नमाज पढ़ी जाती थी। जबकि अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू राम चबूतरा, सीता रसोई की पूजा करते थे। जिसके रिकार्ड में प्रमाण हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मुस्लिमों के पास जमीन का कब्जा भी नहीं है। जबकि हिंदुओं के पास बाहरी आहते की जमीन का अधिकार है। बाबर के दौर में बनायी गई मस्जिद बाबर के दौर में मस्जिद बनायी गई थी। बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। सीजेआई ने कहा कि पुरातात्विक सबूतों को खारिज नहीं कर सकते। उनका मूल्यांकन करने की जरुरत है। एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर बने होने की बात कही है। लेकिन आस्था और विश्वास पर मालिकाना हक नहीं बनता। आस्था के बजाए कानून के आधार पर फैसला होगा। क्योंकि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की पुख्ता जानकारी नहीं है। खुदाई में इस्लामिक ढ़ांचा नहीं मिला रंजन गोगोई ने कहा कि खुदाई में जो मिला वो इस्लामिक ढ़ांचा नहीं है। एएसआई ने मस्जिद का जिक्र नहीं किया। रिपोर्ट में 12वीं शताब्दी का मंदिर होने की बात कही गई है। लेकिन यह जमीन, राम जन्म भूमि है या नहीं, ये स्पष्ट नहीं है। हिंदुओ की आस्था वहां पर है कि राम का जन्म हुआ है। हिंदू आस्था और उसके गलत होने का कोई प्रमाण नहीं है। लेकिन आस्था पर कोई सवाल नहीं है। जमीन विवाद पर फैसला कानूनी आधार पर किया जाएगा। मंदिर गिराकर मस्जिद बनाने के कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में गुंबद के नीचे मंदिर होने के प्रमाण की बात कही है। इस दौरान न्यायालय ने निर्मोही अखाड़े के दावा खारिज कर दिया है। निर्मोही अखाड़े का दावा लिमिटेशन से बाहर का है। निर्मोही अखाड़े को सेवायत का अधिकार नहीं है। जानकारी के मुताबिक मामले पर दोपहर बाद ही फैसला आने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवायी से पहले एहतियातन यूपी के कई जिलों में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है। इसके अलावा विद्यार्थियों की 11 नवंबर तक छुट्टी कर दी गई है। दूसरी तरफ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 1 बजे करेंगे प्रेसवार्ता। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रेस वार्ता की जाएगी। जिसमें राष्ट्र के नाम दे सकते हैं महत्वपूर्ण संदेश। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। आरएसएस का कहना है कि मोहन भागवत दिल्ली में केशवकुंज परिसर, झंडेवालान में मीडिया के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करेंगे। वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उच्च स्तरीय बैठक बुलायी है। जिसमें एनएसए अजीत डोवाल, आईबी प्रमुख अरविंद कुमार सहित अन्य भाग ले रहे हैं।