सुबह से ही खरीदी केंद्रों में पहुंच रहे अन्नदाता, धान की रखवाली सबसे बड़ी चिंता
जांजगीर-चांपा। प्रदेश में इस वर्ष अन्य वर्षों से 15 दिन देर से एक दिसंबर से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी शुरू हुई। नतीजतन, पहले ही दिन से अन्नदाता सुबह से ही खरीदी केंद्रों में पहुंच रहे हैं। किसानों को धान बेचने के लिए टोकन लगभग डेढ़ महीने बाद का मिल रहा है। ऐसे में फसल काट चुके किसानों के लिए खेत और खलिहान में धान की रखवाली सबसे बड़ी चिंता है।
गौरतलब है कि समर्थन मूल्य नीति के तहत जिले में 121 सहकारी समितियों के 206 खरीदी केंद्रों के जरिए किसानों से धान की खरीदी की जा रही है। जिले में धान खरीदी को प्रारंभ हुए सप्ताह भर बीत चुके हैं, लेकिन अब तक खरीदी केन्द्रों से धान का उठाव नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि स्टॉक जमा होने से कई केंद्रों में खरीदी के लिए जगह की कमी हो रही है। बता दें कि खरीदी केंद्रों से धान का उठाव राइस मिलर्स के माध्यम से होता है। खरीदी को सात दिन गुजर गए, लेकिन अभी तक किसी भी खरीदी केंद्र से उठाव शुरू नहीं हुआ है। दरअसल, शासन ने धान का उठाव करने वाले ट्रकों में जीपीएस लगाने का निर्देश दिया है, लेकिन मिलर्स इसका विरोध कर रहे हैं। इस कारण उठाव में देरी हो रही है। जिला विपणन अधिकारी ने बताया कि शासन के निर्देश के मुताबिक सभी वाहनों को जीपीएस से जोडऩा होगा। इसके बगैर डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) और ट्रांसपोर्ट ऑर्डर (टीओ) जारी नहीं होगा।
किसानों को सता रही कर्ज की चिंता
धान खरीदी में देरी होने से किसानों को कर्ज की चिंता सता रही है। किसानों को धान की कटाई, ढुलाई, मिंजाई का भुगतान करना है। कटाई के तुरंत बाद ओनहारी फसल की बोवाई शुरू हो गई है। ऐसे में वे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, मजदूरों के भुगतान के साथ साहूकारों के कर्ज के भुगतान को लेकर चिंतित हैं। जिला मुख्यालय जांजगीर के आसपास के किसानों ने बताया कि उन्होंने एचएमटी और सरना धान की फसल ली। फसल की कटाई और मिंजाई हो गई है, लेकिन धान की बिक्री के लिए टोकन अगले माह का मिला है। ऐसे में साहूकार से लिए कर्ज और मजदूरों के भुगतान को लेकर वे चिंतित हैं।
किसानों का कहना है कि उन्हें काफी दिनों बाद का टोकन मिला है। जबकि, मिंजाई के बाद धान खुले में पड़ा है। इससे धान में नमी आ सकती है। वहीं पशुओं का भी डर बना हुआ है। केंद्र में धान का स्टॉक जमा होने से खरीदी धीमी हो गई है।