जांजगीर-चांपा। विधानसभा चुनाव के दौरान पिछले साल चुनावी सभा लेने चांपा पहुंचे राहुल गांधी ने कहा था कि जिले में औद्योगिक संयंत्रों का विस्तार करने सरकार ने किसानों से बड़े पैमाने पर जमीन ली थीए लेकिन धरातल पर चंद उद्योग ही शुरू हो पाए। ऐसे में सैकड़ों किसानों को उनकी कृषि भूमि वापस नहीं मिली। उन्होंने कांग्रेस की सरकार बनने पर ये सभी किसानों की भूमि वापस दिलाने का भी दावा किया था। लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इस दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी है।
कृषि प्रधान जिले के 90 प्रतिशत खेतों में सिंचाई की व्यवस्था है। 2ण्60 लाख हेक्टेयर भूमि में खरीफ की फसल ली जाती है। हर साल यहां करीब 75 लाख क्विंटल धान का उत्पादन होता है लेकिन आने वाला दिन खेती किसानी के लिए अच्छे नहीं है। कुछ साल पहले सरकार ने जिले को पावर हब बनाने के लिए करीब दो दर्जन औद्योगिक संयंत्रों से एमओयू किया था। जिले के अकलतरा, बम्हनीडीह, डभरा, बलौदा, नवागढ़ व अकलतरा ब्लाक के विभिन्न गांवों में संयंत्र लगाने के लिए करीब 648.67 हेक्टेयर शासकीय जमीन संयंत्र प्रबंधनों को लीज पर दिया गया थाए वहीं 1656.769 हेक्टेयर निजी भूमि का अर्जन किया गया था। जिले के किसानों से डेढ़ हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि लेने के बाद अधिकांश संयंत्र विभिन्न कारणों से शुरू ही नहीं हो सके। इस वजह से कृषि का रकबा कम हो गया। किसानों को आस थी कि जमीन देने के बाद उन्हें रोजगार मिलेगी। जबकि सरकार ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया। अब ये किसान न तो खेती कर पा रहे हैं और न ही कोई अन्य काम इन्हें नसीब हो रहा है। जिले में अभी पीआईएल, छग स्टील एंड पावर लिमिटेड, एमबीपीएल, केएसके महानदी वर्धाए डीबी पावर, मड़वा पावर, लाफार्ज आदि संयंत्र संचालित हैं। इधरए वोटिंग से पहले कांग्रेस हाईकमान राहुल गांधी ने चांपा के कोटाडबरी में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए इस मुद्दे पर हुंकार भरी थी। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि सरकार ने उद्योग लगाने के नाम पर सैकड़ों किसानों की जमीन ले ली, जबकि अधिकांश उद्योग प्रारंभ ही नहीं हो सके। इसके बावजूद किसानों को उनकी जमीन वापस नहीं की गई। उन्होंने दावा किया यदि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो जिले के किसानों को उनकी जमीन वापस दिलाई जाएगी। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद बस्तर की जमीन किसानों को वापस लौटाई गईए लेकिन जांजगीर चांपा जिले में इस तरह का प्रयास नहीं किया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब जिला प्रवास पर आए थे, तब हमनें उनसे इस संबंध में सवाल किया थाए तब उन्होंने जिला प्रशासन का जिम्मा बताया था। कृषि प्रधान जिले की पहचान आने वाले दिनों में प्रदूषण प्रधान के रुप में की जाएगी। वर्तमान में संचालित पावर कंपनियों के पास राखड़ डेम की व्यवस्था नहीं हैए जिस कारण कंपनी से निकले राखड़ को इधर-उधर डंप कर दिया जाता है तो वहीं प्लांटों की चिमनी से बड़ी मात्रा में राखड़ हवा में प्रवाहित होकर लोगों के स्वास्थ्य पर विपरित असर डाल रहा है। पहले ही पीआईएल सहित अन्य पावर कंपनियों के प्रदूषण से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। प्रदूषण की रोकथाम के लिए पौधरोपण व ईएसपी के उपयोग का प्रावधान है, लेकिन पावर कंपनी पोधरोपण के प्रति कोताही बरत रही हैए वहीं बिजली बचाने के फेर में ईएसपी का उपयोग नहीं किया जाता। ज्ञात हो कि जिले के बलौदा ब्लाक में शारडा पावर, आर्यन कोल बेनिफिकेशन प्रालि प्रस्तावित था। डभरा ब्लाक में डीबी पावर, अथेना छग पावर लिमिटेड, चंबल इंफ्रास्ट्रक्चर वेंचर्स लिए सूर्यचक्रा पावर प्रालि, आरकेएम पावरेजन प्रालि, एस्सार पावर लिए भूषण पावर, बीईसी पावर प्रालि आदि प्रस्तावित था। इनमें डीबी व अथेना ही अस्तित्व में आया। इसी तरह नवागढ में कनार्टक पावर लि व सोना पावर प्रस्तावित था। बम्हनीडीह में जैन पावर लिए श्याम पावर लिए मोजर बियर पावर, सक्ती में आधुनिक पावर, श्याम पावर, पामगढ़ में केवीके पावर, इस्पात इंड लिए मालखरौदा में इंड भारत पावर लिए अकलतरा में केएसके पावर प्रस्तावित था। केएसके महानदी वर्धा पावर प्लांट प्रारंभ है।