जांजगीर-चांपा। करोड़ रुपए की लागत से जांजगीर चांपा के बीच कुलीपोटा में निर्मित पर्यटन विभाग का मोटल खण्डहर हो रहा है। ऐसे में शासन का करोड़ो रुपए व्यर्थ चला गया। मोटल को ठेके पर संचालित करने वाला ठेकेदार भी इसका संचालन पांच साल तक नहीं कर सका और तीन साल में ही पर्यटन मण्डल ने मोटल को टेकओव्हर कर लिया। राज्य शासन के पर्यटन विभाग द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए वर्ष 2008 में जांजगीर चांपा के बीच ग्राम कुलीपोटा में टूरिस्ट मोटल का निर्माण किया गया। इसमें 1 करोड़ 70 लाख 91 हजार रुपए खर्च हुए। इसका लोकार्पण फरवरी 2009 में हुआ। इस मोटल के निर्माण के पीछे शासन की यह मंशा थी कि इससे जांजगीर चांपा जिले का भ्रमण करने आने वाले पर्यटकों के रहने व भोजन का बेहतर इंतजाम हो सके मगर जिले में पर्यटन की अन्य कोई गतिविधियां संचालित नहीं होने तथा पर्यटक नहीं आने के कारण यह मोटलखाली पड़ा रहा। वर्ष 2010 में पर्यटन मण्डल ने इस मोटल को ठेके पर दिया। ठेकेदार द्वारा लगभग तीन साल तक यहां मोटल का संचालन किया गया मगर नगर से बाहर होने के कारण यहां ग्राहक भी नहीं पहुंचे। कुछ शादियां यहां से जरूर हुई मगर ठेकेदार को फायदा नहीं हुआ। अंतत: पर्यटन मण्डल ने उसे टेकओव्हर कर लिया और उसकी सुरक्षा निधि जब्त कर ली गई। ठेकेदार पर लगभग 4 लाख रुपए बकाया है। इसकी रिकव्हरी की कार्रवाई मण्डल द्वारा की जा रही है। इधर मोटल फिर से पर्यटन विभाग के कब्जे में आ गया मगर बिना सुरक्षा के विभाग ने भगवान भरोसे छोड़ दिया। इसे सुनसान पाकर इस पर चोरों की नजर लग गई और चोरों के द्वारा वहां लगे खिड़की दरवाजे को पार कर दिया गया वहीं खिड़कियों के सीसे व सोलर सिस्टम को भी चोर ले गए। यहां सुरक्षा व देखरेख की जिम्मेदारी नहीं होने के कारण यहां चोरी अनवरत जारी है मगर इसकी परवाह किसी को नहीं है। साल भर तक यहां किसी ने ताला लगाने की जहमत नहीं उठाई। इसके चलते धीरे.धीरे करके यहां के अधिकांश दरवाजे खिड़की पार हो गए मगर इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। ऐसे में शासन का 1 करोड़ 70 लाख रुपए व्यर्थ चला गया और टूरिस्टों को भी इसका कोई लाभ नहीं मिला। इस तरह के अव्यवहारिक फैसले से जनता की गाढ़ी कमाई की राशि व्यर्थ चली गई। इधर टूरिस्ट मोटल अब खण्डहर में तब्दील हो रहा है।
जिस समय इस मोटल के निर्माण की रूपरेखा तैयार की गई उस समय प्रशासन के कर्ताधर्ताओं ने नगर के बाहर ऐसी जगह का चुनाव किया जो जांजगीर और चांपा दोनों शहर से चार से पांच किमी की दूरी पर स्थित है। ऐसे में यह भवन निर्माण के बाद से ही बदहाली की भेंट चढ़ गई। इस ओर जिले में कई विभागों का कार्यालय किराए के भवन में संचालित हो रहा है। दूसरी ओर पर्यटन मण्डल के एक करोड़ से अधिक का भवन खण्डहर हो रहा है। विभागीय तालमेल कर इस मोटल में किसी कार्यालय का संचालन किया जा सकता है मगर इस ओर किसी क ा ध्यान नहीं है।