नईदिल्ली, 2३ जनवरी [एजेंसी]।
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि कह देश विरोधी नारे नहीं लगने चाहिए। ये नारे अलगाववाद के नारे हैं। इनका नागरिकता संशोधन कानून 2019 (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में जगह नहीं है। वे हमारे देश की अखंडता पर सवाल उठाते हैं। इससे सीएए के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन भी कमजोर हो रहा है।
देश के कई हिस्सों में नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। वहीं इसके समर्थन में भी प्रदर्शन हो रहा है। इसी बीच अभिषेक मनु सिंघवी का ट्विटर पर यह बयान आया है। इससे इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन पर सवाल उठने लगे हैं। यह कानून पिछले साल दिसंबर में संसद में पास हुआ था। इस कानून में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से सताए जाने के कारण भारत आए धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान है, जो लोग 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हैं। इस कानून को लेकर देश में घमासान मचा हुआ है। विपक्ष का कहना है कि सराकर यह कानून मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए लाई है, वहीं सरकार ने बार-बार ये बात साफ किया है कि इस कानून का मकसद केवल और केवल इन तीन देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देना है। इससे किसी के नागरिकता पर कोई खतरा नहीं है। विपक्ष सीएए के बारे में अफवाहें फैला रहा है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सीएए पर गृहमंत्री अमित शाह को बहस करने की चुनौती दी है। मदुरै में एक सभा को संबोधित करते हुए, हैदराबाद से लोकसभा सांसद ने कहा कि अमित शाह सीएए के बारे में बहस करने के लिए सभी को आमंत्रित करते हैं। क्या वह मेरे साथ बहस करने के लिए तैयार हैं। एआईएडीएमके सरकार को सीएए के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। एनपीआर और एनआरसी का कार्यान्वयन मुसलमानों के खिलाफ होगा। सीएए के खिलाफ पूरे संघर्ष के लिए आपको मेरा समर्थन है।