कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के डायरेक्टर टेक्निकल आरके निगम ने कोरबा जिले के प्रवास के दौरान कंपनी के अधिकारियों की कुसमुंडा में बैठक ली। आधी अधूरी जानकारी के साथ जो अधिकारी यहां पहुंचे थे उन्हें खरी खोटी सुनने को मिली। खदानों से होने वाले कोयला उत्पादन और अन्य बिंदुओं को लेकर उच्च अधिकारी ने व्यापक पूछताछ की।
वित्त वर्ष 2019-20 के लिए एसईसीएल को कोल इंडिया ने जो लक्ष्य दिया है उसके सापेक्ष 60 फ़ीसदी से ज्यादा पूर्ति कर ली गई है । 40 प्रतिशत के लिए काम करना बाकी है। मार्च 2020 तक इस काम को हर हाल में किया जाना है। बारिश के दौरान कोरबा जिले की सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाली कुसमुंडा गेवरा और दीपका विस्तार परियोजनाओं में कई तरह की समस्याएं आई। उत्पादन पर असर पड़ा। इसे देखते हुए रणनीतिक फैसले लिए गए हैं और अंतर को पाटने का काम किया जा रहा है। एसईसीएल के डायरेक्टर टेक्निकल का दौरा इसी कड़ी में हुआ। शुक्रवार को कोरबा जिले के कुसमुंडा पहुंचकर निगम ने सभी क्षेत्रों के उत्खनन से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें सीजीएम जीएम, एजीएम और अन्य स्तर के अधिकारी शामिल हुए। खबरों में कहा गया है कि बैठक से संबंधित बिंदुओं के बारे में पहले ही अवगत करा दिया गया था और तैयारी करने के बारे में कहा गया था। इसके बाद भी कई अधिकारी आधी अधूरी जानकारी के साथ यहां पहुंचे। जब पूछताछ की बारी आई तो कई अधिकारी बगले झांकते नजर आए। ऐसे मातहतों पर डायरेक्टर टेक्निकल ने अपनी खींझ उतारी। उत्पादन के बारे में आवश्यक जानकारी दी गई हर हाल में निर्धारित लक्ष्य को मार्च तक पूरा करने पर फोकस किया गया। पूर्व निदेशक तकनीकी कुलदीप प्रसाद की सेवानिवृत्ति के बाद कंपनी ने आर.के. निगम को इस पद की जिम्मेदारी दी है। इसका निर्वाह करने और कारपोरेट सेक्टर के हितों को मजबूत करने की दिशा में काम जारी है। कहा जा रहा है कि इन्हीं कारणों से निदेशक स्तर के अधिकारी ने बैठक में बिल्कुल अलग तेवर दिखाए। बैठक खत्म होने के बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली उनके सामने कुल मिलाकर यही चुनौती बनी हुई है कि किसी भी तरह वित्त वर्ष की समाप्ति तक निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति का काम हो जाए।