जांजगीर। जिले के शासकीय गोदामों व राशन दुकानों में घटिया, अमानक एवं पुराने चावल की आपूर्ति की गई है। जिसे हितग्राहियों को वितरण किया गया। यह चावल न तो गुणवत्ता की कसौटी पर खरा उतरी है और न ही मापदंडों के अनुरूप है। पाउडर चावल की मात्रा 10 प्रतिशत से अधिक पाई गई थी। जिससे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
इस पूरे प्रकरण में यह भी प्रकाश में आया है कि सारंगढ़ के मिलरों द्वारा दीगर जिलों के लिए स्वीकृत चावल को अवैध रूप से जांजगीर-चांपा में खपाया गया है और नान के कुछ अधिकारियों द्वारा उक्त चावल को बिना कैमिकल जांच के स्वीकार कर लिया गया है। इस प्रक्रिया में कथित रूप से आर्थिक लेन-देन और सौदेबाजी के गंभीर आरोप लगे हैं।
मामले की शिकायत जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू द्वारा उच्चाधिकारियों को की गई थी लेकिन एक माह बाद भी इस मामले में दोषियों के ऊपर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। यह प्रकरण न केवल शासकीय योजनाओं में भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि आम जनता के साथ गंभीर धोखाधड़ी और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ है।