
लोनी, १९ फरवरी ।
शहर में अवैध रूप से घरेलू गैस सिलिंडरों की रीफिलिंग का धंधा दिन-ब-दिन पैर पसारता जा रहा है। इस खतरनाक व्यापार को लेकर प्रशासन की लापरवाही को उजागर हो रही है। आपूर्ति विभाग इस मामले को लेकर खामोश है। वहीं, अवैध रीफिलिंग करने वाले खुलेआम बाजार और घरों में सिलिंडर भरने का कार्य कर रहे हैं। शहर के शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र हो जहां पर अवैध रीफिलिंग का खेल नहीं चल रहा हो। मौजूदा समय में लोनी राहुल गार्डन, लक्ष्मी गार्डन, पूजा कालोनी, संगम विहार, न्यू विकास नगर, आर्य नगर, परम हंस विहार,तिलक राम कालोनी, उत्तरांचल बिहार, अमित विहार में अवैध गैस रीफिलिंग का खतरनाक जाल फैला है। घरेलू गैस सिलिंडरों की रीफिलिंग की कालाबाजारी का धंधा दिनों-दिन गुलजार हो रहा है। इन स्थानों पर न तो सुरक्षा मानक थे, न कोई लाइसेंस। रिहायशी इलाकों में खुलेआम चल रहे इस खतरनाक धंधे को लेकर तहसील प्रशासन, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और पुलिस तीनों ही विभाग सुस्त नजर आते हैं। न तो कोई ठोस सर्वे कराया गया है, न ही कोई निरंतर अभियान चलाया गया। यहां किराये के मकान में रहने वाले निम्न आय वर्ग के लोग पांच किलो और दो किलो के छोटे गैस सिलेंडर का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए करते हैं। अवैध तरीके से गैस रीफिलिंग करने वाले दुकानदार एक सिलिंडर में प्रतिदिन एक से डेढ हजार रुपये की कमाई करते हैं। बड़े सिलिंडर में लगभग 14 किलो गैस होती है, जिसकी कीमत लगभग नौ सौ रुपये है, वहीं गैस रीफिलिंग करके भरने पर प्रति किलो लगभग सौ से डेढ़ सौ रुपये वसूले जाते हैं।
ऐसे में एक घरेलू सिलिंडर की गैस को लगभग दो हजार रुपये में बेची जा रही है। इस तरह अवैध गैस रिफलिंग में एक सिलेंडर से दोगुना तक फायदा है।अवैध रूप से बिकने वाले इन छोटे गैस सिलेंडरों को पतले चदरों से बनाया जाता है। ज्यादा प्रेसर से गैस डालने या आग पकडऩे के बाद इन गैस सिलेंडरों के फटने की आशंका ज्यादा रहती है। वहीं अधिकतर किराए के मकान में रह रहे लोग इन छोटे सिलेंडरों के ऊपर ही बर्नर लगाकर खाना बनाते हैं। बर्नर के कारण सिलेंडर जल्द ही गर्म हो जाता है, जो कि बहुत खतरनाक है। इन सिलेंडरों में गैस का आउटलेट पिन भी काफी कमजोर होता जिससे गैस लीक होने की शिकायतें ज्यादा रहती हैं। ऐसे सिलेंडरों में लगने वाले रेगुलेटर भी लोकल होते हैं।



















