वीडियो विवाद के बाद सीएम ने मंत्री भुल्लर का इस्तीफा लिया; अमृतसर में वेयरहाउस अधिकारी की मौत के बाद उठाया कदम

चंडीगढ़/तरनतारन। पंजाब स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन (पीएसडब्ल्यूसी) के जिला मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा के सल्फास खाकर आत्महत्या करने वाला वीडियो के आने से मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत भुल्लर का इस्तीफा ले लिया है। इस मामले की जांच उन्होंने मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को दे दी है। गगनदीप सिंह रंधावा इन दिनों जिला अमृतसर में तैनात थे।
गगनदीप सिंह के सल्फास निकालने के बाद एक वीडियो इंटरनल मीडिया पर प्रसारित की जिसमें कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर पर आरोप लगाए गए हैं। अमृतसर निवासी गगनदीप सिंह रंधावा ने रात को एक वीडीओ इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किया। जिसमें वह कह रहे हैं कि मैने सल्फास खा ली है। सूत्रों की मानें तो विभाग के गोदाम लिए किसी ने जगह देने लिए निवेदन दिया था।
विभाग की टीम ने पाया कि जो जगह गोदाम लिए प्रस्तावित की जा रही है इसके ऊपर से बिजली की हाई वोल्टेज तारें है। नतीजन विभाग ने उक्त जगह पर गोदाम बनाने से मना करते प्रस्तावित निवेदन रद्द कर दिया था। शुक्रवार को अमृतसर फेरी मौके मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने डीएम गगनदीप सिंह रंधावा पर कथित रूप में दबाव बनाया था। रंधावा के साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप है जिसके दुखी होकर डीएम गगनदीप सिंह रंधावा ने सल्फास निगल ली थी। इस बाबत मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के साथ राब्ता बनाने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने अपना मोबाइल 9874000007 रसीव नहीं किया। उधर, विपक्ष के नेताओं ने सरकार को घेरा है। कांग्रेस के विधायक सुखपाल खैहरा, अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने अपने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट डालकर मुख्यमंत्री से मंत्री लालजीत भुल्लर के इस्तीफे का दबाव बनाया है। खैहरा ने अपनी पोस्ट में कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की।
उन्होंने दावा किया कि रंधावा ने अपनी अंतिम वीडियो में मंत्री का नाम लिया और मानसिक व शारीरिक प्रताडऩा के आरोप लगाए। खैहरा ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं होती तो यह संदेश जाएगा कि पुलिस का इस्तेमाल केवल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ किया जा रहा है।वहीं, बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी को इस हद तक दबाव में लाया गया कि उसे अपनी जान गंवानी पड़ी, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मजीठिया ने अधिकारियों पर दबाव बनाए जाने के आरोपों को चिंताजनक बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मामले में यह भी सामने आया है कि मृतक द्वारा कथित तौर पर एक वीडियो में कुछ आरोप लगाए गए हैं, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। दोनों नेताओं ने मांग की है कि मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए और सभी अहम सबूत, विशेषकर मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड, सुरक्षित रखे जाएं।

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