दिल्ली में कम करने के बजाय प्रदूषण बढ़ाने में मदद कर रहीं एंटी स्मॉग गन, विशेषज्ञों ने बताया खतरनाक

नई दिल्ली। राजधानी में वायु प्रदूषण के कारण ग्रेप का चौथा चरण लागू हो गया। ऐसे में सडक़ों पर उडऩे वाली धूल को खत्म करने के लिए चल रही एंटी स्मॉग गन प्रदूषण खत्म करने के बजाय अनजाने में इसे बढ़ाने में सहायक बन रही है। क्योंकि सडक़ों पर धीमी गति के कारण पानी छिडक़ाव करते हुए चलने वाली इस एंटी स्मॉग गन से कई स्थानों पर जाम लगता है। इस जाम में फंसने के कारण वाहनों का प्रदूषण बढ़ता है।दिल्ली में जैसे ही वायु गुणवत्ता स्तर बढ़ता है तो एमसीडी से लेकर डीडीए, एनडीएमसी और लोक निर्माण विभाग एंटी स्मॉग गन का उपयोग बढ़ा देते हैं। इस समय करीब 300 एंटी स्मॉग गन सडक़ों पर दौड़ रही हैं। एक एंटी स्मॉग प्रतिदिन 25-30 किलोमीटर चलती है और उस इलाके में जाम का कारण बनती है। इसमें पीडब्ल्यूडी की ही करीब 200 मशीनें हैं।इसके अलावा एडीएमसी की आठ, डीडीए की सात, दिल्ली जल बोर्ड की 21, एनसीआरटीसी की नौ, डीएसआईआईडीसी की आठ, डीएमआरसी की छह, एमसीडी की 28, एनएचएआई की चार, आईएफसीडी की एक एंटी स्माग गन पानी का छिडक़ाव करते हुए सडक़ पर चलती है।एंटी स्मॉग गन एक भारी वाहन पर स्थापित होती है। इसमें मौजूद पानी का छिडक़ाव सडक़ पर किया जाता है। इससे हवा में उडऩे वाली धूल तो नीचे बैठने लगती है लेकिन छिडक़ाव के लिए वाहन की गति धीमी रखनी पड़ती है। इसके कारण इस वाहन पीछे गति थम जाती है। इसकी वजह से कई स्थानों पर जाम जैसी स्थिति बन जाती है। जाम से फंसे वाहनों से कार्बन मोनोआक्साइड, नाइट्रोजन के आक्साइड, कार्बन डाईआक्साईड हाइड्रोकार्बन और बेंजीन जैसे हानिकारक गैसें व कण निकलते हैं। जब एक ही स्थान पर गाडिय़ां जाम में फंसती हैं तो इनका उत्सर्जन बढ़ जाता है।
रफी मार्ग पर दौड़ती एनडीएमसी की एंटी स्माग गन के कारण पीछे जाम लगा हुआ था। इसी तरह पूर्वी दिल्ली में आनंद विहार बस अड्डे के बाहर की सडक़ पर चलती एंटी स्माग गन पानी का छिडक़ाव करती हुई नजर तो आ रही थी लेकिन इसके पीछे 300-400 मीटर लंबा जाम भी नजर आया। दक्षिणी दिल्ली के आउटर रिंग पर नेहरू प्लेस बस टर्मिनल के पास भी कुछ ऐसा ही दृश्य था। यहां एंटी स्मॉग गन के पीछे वाहनों की कतार लगी हुई थी। लोग पांच से दस मिनट तक जाम में फंस रहे थे। एंटी स्माग गन के कारण लगने वाले जाम पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या के निजात के लिए ही मिस्ट स्प्रे का उपयोग किया जा रहा है। सडक़ों पर बिजली के खंभों पर मिस्ट स्प्रे लगाया जा रहा है जिससे पानी का छिडक़ाव तो होता है लेकिन जाम भी नहीं लगता है। इसके लिए मिस्ट स्प्रे की संख्या बढ़ाने की योजना है।
एंटी स्मॉग गन का उपयोग वैसे तो सडक़ पर धूल न उड़े, इसके लिए किया जा रहा है लेकिन कई लोग अपने वाहन भी इससे धो रहे हैं। इसके लिए कई वाहन इस मशीन के पीछे-पीछे चलते नजर आते हैं, जो कि जाम की वजह बनते हैं। इससे उस गाड़ी की भी धीमी गति दूसरों को भ्रम में डाल देती है और दूसरे वाहन चालक भी अपने वाहन को धीमा कर लेते हैं, जिससे जाम लग जाता है।यह मशीन वायु प्रदूषण को कम करने में कितनी मददगार है इसका कोई अध्ययन नहीं हुआ है। बस सरकार को अधिकारियों को कुछ न कुछ करना है तो वायु प्रदूषण के नाम पर एंटी स्माग गन चला रखी है, जो कि धीमी गति से चलने के कारण जाम का कारण बनती हैं। इस तरह से ये अनजाने में प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके स्थान पर अन्य विकल्प को देखना चाहिए। – जगदीश ममगांई, शहरी मामलों के जानकार व पूर्व चेयरमैन एमसीडी निर्माण समिति

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