
भागलपुर। डाक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक का उपयोग या दवा का कोर्स पूरा नहीं करने से शरीर में मौजूद बैक्टीरिया दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। यह स्थिति आगे चलकर एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस का कारण बन जाती है, जिससे सामान्य संक्रमण का इलाज भी कठिन हो जाता है।
यह जानकारी गुरुवार को हैप्पी वैली स्कूल में दैनिक जागरण और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा आयोजित एंटीबायोटिक दवा के खिलाफ जागरूकता अभियान के दौरान दंत रोग विशेषज्ञ डा. सुभांकर कुमार सिंह ने साझा की।
डॉ. सुभांकर ने बताया कि एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में अत्यंत उपयोगी होती हैं, लेकिन इनका अनावश्यक और बिना चिकित्सकीय सलाह के उपयोग आज विश्वभर में गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। दंत चिकित्सा में, दांत दर्द, मसूड़ों की सूजन या अन्य समस्याओं के लिए कई लोग स्वयं एंटीबायोटिक खरीदकर सेवन कर लेते हैं। हालांकि, कुछ समय के लिए दर्द से राहत मिल सकती है, लेकिन संक्रमण पूरी तरह समाप्त नहीं होता और बाद में यह अधिक गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर बुखार, सर्दी-खांसी या दर्द में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती। वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी नहीं होतीं, फिर भी लोग बिना जानकारी के इनका उपयोग करते हैं, जो भविष्य में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।






























