पराली जलाने से एक्यूआई 100 के पार पहुंच गया

जांजगीर। खेतों में पराली जलाने का असर वातावरण पर पड़ रहा है। धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को किसान जला रहे हैं। इसका असर वातावरण पर पड़ रहा है और इससे हमारी जीवनदायिनी हवा प्रदूषित हो रही है। इसे एयर क्वालिटी इंडेक्स से परखा जा रहा है। गुरुवार और शुक्रवार को खोखसा गांव के आसपास बड़ी मात्रा में पराली जलाने का असर जांजगीर शहर में दिखा और शहर का एक्युआई 100 पार कर गया । मौसम विभाग के एप के अनुसार शुक्रवार की शाम छत्तीसगढ़ के लिए एक्यूआई लगभग 110-150 के बीच रहा, जो खराब और स्वास्थ्य के लिए खराब माना जाता है। इसका मतलब है कि हवा अभी सामान्य लोगों के लिए थोड़ा खराब हो सकती है, और सांस की समस्या वाले या संवेदनशील लोगों को बाहर निकलते समय सावधानी बरतनी चाहिए। वेबसाइट के अनुसार शनिवार को एक्युआई लगभग 119 जैसा राज्य स्तर पर भी रिपोर्ट हुआ है। कुछ लाइव डेटा स्रोत लगभग 148 (अपहेल्थी) तक भी दिखा रहे हैं।
पराली जलाने पर रोक राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने हरियाणा, पंजाब और छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में पराली जलाने पर रोक लगाई है। छत्तीसगढ़ सरकार के आदेश के अनुसार, खेत में पराली जलाने पर वायु प्रदूषण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। पहली बार पकड़े जाने पर: ?25,000 तक का जुर्माना या चेतावनी। बार-बार करने पर: ?50,000-?1,00,000 तक का जुर्माना और/या 6 महीने तक की जेल हो सकती है।

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