पदोन्नति में हो गया बड़ा खेल, बिना काउंसिलिंग के मनमानी पोस्टिंग

जांजगीर-चांपा। जिले का शिक्षा विभाग के बाबुओं और भृत्य की पदोन्नति को लेकर एक बार फिर से सवालों के घेरे में है। विभाग द्वारा तीन दर्जन के करीब कर्मचारियों की पदोन्नति की गई है। खास बात यह है कि पदोन्नति के बाद पदस्थापना के लिए किसी प्रकार की काउंसिलिंग नहीं कराई गई। सभी को मनमाने तौर पर पदस्थापना आदेश जारी कर दिया गया। बताया जाता है कि इसमें लाखों रुपए की लेनदेन की गई है।
गौरतलब है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में विगत दिनों भृत्य और बाबुओं की पदोन्नति सूची जारी की गई। इसमें 19 चपरासी को सहायक ग्रेड 3 के पद पर पदोन्नति मिली है। इसी तरह 11 लिपिकों को पदोन्नत करके सहायक ग्रेड 3 से सहायक ग्रेड 2 बनाया गया है। बताया जाता है कि पदोन्नत होने वाले कर्मचारियों को नई पदस्थापना के लिए शासन के नियमानुसार काउंसिलिंग की प्रक्रिया अपनाई जाती है, लेकिन जिम्मेदार जिला शिक्षा विभाग ने इसकी आवश्यकता नहीं समझी। विभागीय सूत्रों की माने तो पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों को उनकी सुविधा अनुसार मनमाने स्थानों में पदस्थ करने का आदेश ग्रेड 3 के पद में प्रति जारी हुआ। बताया तो यहां तक जाता है कि इसके एवज में कर्मचारी 80 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक का दर भी अघोषित रूप से निर्धारित हो गया था। जिसके आधार पर जिम्मेदार विभाग द्वारा काउंसिलिंग की प्रक्रिया अपनाए बगैर मनमाने तौर पर पदोन्नत कर्मचारियों की पोस्टिंग कर दी गई।
उल्लेखनीय है कि बीते जून जुलाई महीने में अतिशेष शिक्षकों के समायोजन ओर पदोन्नत शिक्षकों को शाला देने की कार्रवाई हुई तो विभाग द्वारा शासन के निर्देश पर पूरी पारदर्शिता बरतते हुए व्यापक पैमाने पर काउंसिलिंग की प्रक्रिया अपनाई गई थी, लेकिन बाबुओं की पदोन्नति के बाद पदस्थापना में किसी प्रकार काउंसिलिंग की प्रक्रिया जिम्मेदार द्वारा नहीं अपनाई गई। इसको लेकर लेन देन करने का आरोप लग रहे है, तो वहीं विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे पर है।
संशोधन के नाम पर भी संशोधन के नाम पर चर्चा
शिक्षा विभाग की सूत्रों की माने तो पदोन्नति प्रक्रिया में जहां बिना काउंसिलिंग के मनमाने तरीके से पदस्थापना की गई है, वहीं अब कुछ लोगों के नाम व स्थान में संशोधन की भी चर्चा होने लगी है। बताया जाता है कि जहां बात नहीं बन रही है, वहां ब्लाक चेंज करने की चेतावनी मिलने लगी है।
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक विश्वनाय सिंह परिहार ने बताया कि चपरासी और लिपिकों की पदोन्नति की प्रक्रिया के दौरान फेडरेसन द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी के नाम आवेदन दिया गत था। जिसमें काउंसिलिंग की प्रक्रिया अपनाये जाने की मांग की गई थी, लेकिन शिक्षा विभाग में काउंसिलिंग नहीं हुई । पदोन्नति के बाद पदस्थापना मनमाने तौर से कर दिया गया है। फेडरेशन द्वारा फिर से काउंसलिंग कराए जाने की मांग की जा रही है काउंसलिंग नहीं करने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी भी दी जा रही है।
नियमानुसार पदोन्नति
चपरासी और लिपिको की पदोन्नति नियमानुसार जारी हुई है। वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दिया गया है। रही बात काउंसिलिंग कराने की तो पदोन्नति इसमें काउंसिलिंग का कोई प्रावधान नहीं है। पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत हुई है, जो भी आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे है, यह निराधार है।
अशोक सिन्हा, डीईओ, जांजगीर चापा

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