
नईदिल्ली 1४ जनवरी ।
भारतीय सेना इन्फैंट्री (पैदल सेना) में महिलाओं को शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन यह फैसला समाज की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा। यह बात जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कही। जनरल द्विवेदी ने कहा कि मैंने पहले भी कहा था कि महिलाएं काली माता का रूप है उन्हें किसी भी तरह से कमजोर वर्ग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना की सोच पूरी तरह जेंडर न्यूट्रल है और महिलाओं-पुरुषों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि अगर मानक एक जैसे हों, क्षमताएं समान हों और एक राष्ट्र के रूप में हमारा समाज इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो, तो महिलाओं को लड़ाकू भूमिका में शामिल किया जा सकता है और यह कल से भी संभव है। जनरल द्विवेदी ने कहा है कि सेना में एक समान मानक अनिवार्य हैं, लेकिन चिकित्सा और संचालन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों के कारण इन्हें लागू करना आसान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए नए सैन्य रोल खोलने का फैसला उनके प्रदर्शन के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। सेना प्रमुख ने कहा कि महिलाओं की भूमिका का विस्तार क्रमिक प्रक्रिया होगी। इसकी शुरुआत सहायक बलों से होगी, इसके बाद लड़ाकू बलों और अंतत: स्पेशल फोर्सेज तक रास्ता खुलेगा। उन्होंने इसे क्रमबद्ध और स्वागत योग्य सामाजिक बदलाव बताया।






























