
नई दिल्ली 06 फरवरी। भारतीय सेना ने औपनिवेशिक युग की विरासतों को समाप्त करने और भारत के अपने इतिहास और लोकाचार में निहित संस्थागत पहचान को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल की है। इसके तहत देशभर के विभिन्न छावनियों और सैन्य स्टेशनों में में 246 सडक़ों, भवनों और अन्य स्थानों के भारतीय नाम रखे जा रहे हैं। इसका उद्देश्य राष्ट्र के वीरता पुरस्कार विजेताओं, युद्ध नायकों को सम्मानित करना है। ये कदम राष्ट्रीय विरासत और सेवा मूल्यों के प्रति गौरव को बढ़ावा देते हैं। सेना के अधिकारियों के अनुसार, 124 सडक़ों, 77 कालोनियों, 27 भवनों और अन्य सैन्य केंद्रों, और 18 विभिन्न सुविधाओं, जिसमें पार्क, प्रशिक्षण क्षेत्र, खेल के मैदान, गेट, हेलिपैड आदि शामिल हैं का नामकरण वीरता पुरस्कार से सम्मानित भारतीय शूरवीरों, युद्ध नायकों और विशिष्ट सैन्य शख्यियतों के नाम पर किया जा रहा है। भारतीय सेना के अधिकारी नें कहा, यह पहल वीरता और बलिदान को याद करने की अटूट राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। कोलकाता में, फोर्ट विलियम का नाम विजय दुर्ग रखा गया है, जबकि रंगापाहर सैन्य स्टेशन में खेल परिसर का नाम लैशराम ज्योतिन सिंह स्पोर्ट्स कांप्लेक्स रखा गया है।
जखामा सैन्य स्टेशन में, स्पीयर लेक मार्ग का नाम हैंगपन दादा मार्ग रखा गया है। इस पहल के माध्यम से भारतीय सेना ने राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है कि वे स्थान जहां सैनिक और उनके परिवार रहते हैं, प्रशिक्षण लेते हैं और सेवा करते हैं, स्पष्ट रूप से भारत के अपने नायकों, विरासत और मूल्यों को दर्शाते हैं।

























