
कोरबा। एसईसीएल कोरबा स्थित श्री अय्यप्पा शनेश्वर मंदिर में स्वामी अय्यप्पा सेवा समिति द्वारा रविवार की शाम विशेष अष्ठनाग पूजा का आयोजन किया गया, जिसे कालसर्प दोष के लिए किया जाता है । यह पूजा केवल मलयाली समाज के लिए नहीं बल्कि उन सबके लिए भी अहम होता है जो किसी न किसी रूप में कालसर्प दोष से पीडि़त होते हैं। ढ्ढरूत्र 20260118 23325991 ढ्ढरूत्र 20260118 23324626इस पूजा को केरल से पधारे मुख्य तांत्रिक ब्रह्मश्री उन्नीकृष्णन नमबूदिरी द्वारा संपन्न कराया गया। हिंदू आचार के अनुसार सर्वप्रथम 8 नाग देवताओं को प्राधान्य माना जाता है। इन्हें अष्ठनाग देवता कहा जाता है । ढ्ढरूत्र 20260118 23320571 ढ्ढरूत्र 20260118 23315389
अद्भुत सिद्धि वाले इन नाग देवताओं की आराधना विधि यजुर्वेद एवं अथर्ववेद में विस्तार से बताया गया है। सर्वेश्वर्य मनोकामना के लिए नाग आराधना का विशेष महत्व है । पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नाग पूजा अनुष्ठान प्राणी मात्र के भौतिक, आध्यात्मिक और मानसिक विकास के लिए सहायक साबित होता है । इस अनुष्ठान में प्रत्यक्षत: सहभागी होने से काल सर्प दोष या राहु दोष के कारण हो रही दुविधाओं का निवारण होता है । इसके अलावा संतान सौभाग्य एवं संतानों को होने वाले क्लेशों को दूर करता है । इस अनुष्ठान में केरल से आमंत्रित पुल्लोवन श्री सुधीर एम ए एवं श्रीमती प्रमिला एम आर ने नाग गीत की प्रस्तुति दी ।
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स्वामी अय्यप्पा सेवा समिति के अध्यक्ष चंदशेखर राजेश ने बताया कि इस अनुष्ठान में बतौर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन एवं विशिष्ट अतिथि के तौर पर भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी शामिल हुए । वहीं अन्य समाज के लोगों ने भी इस अनुष्ठान में हिस्सा लेकर अष्ठ नाग देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया ।



















