
नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा हाल ही में की गई कुछ सार्वजनिक टिप्पणियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उन्हें ”सांप्रदायिक, अत्यधिक विभाजनकारी और संविधान की भावना के विपरीत” बताया गया है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदानी ने वरिष्ठ अधिवक्ता एम आर शमशाद के माध्यम से याचिका दायर दी है। अदालत से संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए सख्त और लागू करने योग्य दिशानिर्देश बनाने का आग्रह किया है, ताकि सार्वजनिक पदों का दुरुपयोग किसी भी समुदाय के प्रति नफरत फैलाने या उसे निशाना बनाने के लिए न किया जाए। यह आवेदन जमीयत की एक लंबित याचिका के संदर्भ में दायर किया गया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिका में विशेष रूप से असम के मुख्यमंत्री द्वारा 27 जनवरी को दिए गए भाषण का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।






























