
कोरिया बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के 25वें वर्ष — रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में कोरिया जिले के मिनी स्टेडियम में भव्य राज्योत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न विभागों द्वारा अपनी उपलब्धियों एवं कार्यों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिनमें आयुष विभाग कोरिया की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी।
आयुष विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में विभाग के विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों को सजीवता से प्रदर्शित किया गया। विशेष रूप से आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा पद्धति को अत्यंत सुंदर, सजीव एवं विस्तारपूर्वक दिखाया गया, जिससे आगंतुकों को यह समझने में सरलता हुई कि किस प्रकार पंचकर्म द्वारा शारीरिक और मानसिक रोगों का निवारण किया जाता है। प्रदर्शनी में औषधीय वनस्पतियों की विविध प्रजातियों को भी प्रमुखता से रखा गया, जिनका उपयोग आयुर्वेदिक औषध निर्माण में किया जाता है।
आयुष विभाग ने अपने 25 वर्षों की यात्रा को भी प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत किया। इसमें यह दिखाया गया कि वर्ष 2000 में विभाग की क्या स्थिति थी और आज उन्नति की राह पर चलते हुए आयुष सेवाओं में किस प्रकार से विस्तार एवं सुधार हुआ है। इस प्रदर्शनी ने दर्शकों को विभाग की विकास यात्रा और जनकल्याण के प्रति समर्पण का प्रत्यक्ष अनुभव कराया।
कार्यक्रम में स्वर्ण प्राशन संस्कार को भी विशेष रूप से दर्शाया गया। इसमें बताया गया कि स्वर्ण प्राशन बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने, मानसिक विकास, स्मरण शक्ति एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों द्वारा आगंतुकों को बताया गया कि यह आयुर्वेदिक विधि न केवल रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में भी सहायक सिद्ध होती है।
इसके अतिरिक्त, विभाग द्वारा पंचकर्म चिकित्सा के प्रति लोगों में रुचि बढ़ाने के लिए जीवंत प्रदर्शन किए गए। इन प्रदर्शनों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पंचकर्म एक निरापद, प्राकृतिक और प्रभावी चिकित्सा पद्धति है, जिससे व्यक्ति बिना किसी दुष्प्रभाव के स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हो सकता है।
प्रदर्शनी में आयुष विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और राष्ट्रीय कार्यक्रमों को भी दिखाया गया, जिनका उद्देश्य जनता में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी पद्धतियों के प्रति जनजागरूकता फैलाना है।
राज्योत्सव में आयुष विभाग की यह प्रदर्शनी न केवल सूचना और शिक्षा का माध्यम बनी, बल्कि इसने लोगों के बीच आयुर्वेद के प्रति विश्वास और अपनत्व की भावना को और सशक्त किया। दर्शकों ने आयुष विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आयुर्वेद भारतीय चिकित्सा पद्धति की आत्मा है, जो आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य संरक्षण का सशक्त साधन बन सकती है।
कुल मिलाकर, कोरिया राज्योत्सव में आयुष विभाग की प्रदर्शनी ने ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।




















