
नई दिल्ली। तिरुपति में जिला अदालत परिसर की आधारशिला रखते हुए चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत ने न्याय प्रणाली में बार (वकीलों) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्याय केवल न्यायाधीशों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि बार और बेंच इस प्रणाली के दो अपरिहार्य अंग हैं। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि बार और बेंच विरोधी नहीं, बल्कि एक ही संस्था के दो हाथ हैं।
‘बार’ न्याय प्रणाली का अभिन्न हिस्सा
उन्होंने कहा, “बार न्याय वितरण प्रणाली का अभिन्न हिस्सा है और इसे अलग नहीं किया जा सकता। लोग अक्सर सोचते हैं कि न्याय केवल बेंच की जिम्मेदारी है, लेकिन यह एक मिथक हो सकता है।” उन्होंने आगे कहा कि एक मजबूत बार बेहतर वकालत को जन्म देती है, जो जजों को गहराई से सोचने और स्पष्ट निर्णय लिखने के लिए प्रेरित करती है। जब निर्णय बेहतर और तर्कसंगत होते हैं, तो कानून के शासन में जनता का विश्वास बढ़ता है।
अदालत की तुलना अस्पताल से….
सीजेआई ने अदालतों की तुलना अस्पतालों से करते हुए कहा कि जैसे मरीज अस्पताल में खुद को सुरक्षित महसूस करता है, वैसे ही अदालत में आने वाले वादी को भी यह भरोसा होना चाहिए कि उसे न्याय मिलेगा।उन्होंने शहरीकरण और बढ़ती जनसंख्या का हवाला देते हुए राज्य सरकारों से अपील की कि वे ऐसा न्यायिक बुनियादी ढांचा तैयार करें जो अगले 50 से 100 वर्षों की जरूरतों को पूरा कर सके।
सीजेआई सूर्यकांत ने तिरुमाला मंदिर में की पूजा-अर्चना
सीजेआइ ने तिरुमाला मंदिर में की पूजा-अर्चना सीजेआई सूर्यकांत ने रविवार को तिरुमाला स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में दर्शन किए। सीजेआइ के रूप में कार्यभार संभालने के बाद यह उनकी पहली तिरुमाला यात्रा थी।
































