
Coal India News महारत्न कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने अपने संगठनात्मक ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने दशकों से चली आ रही ‘चेयरमैन’ की व्यवस्था को समाप्त करते हुए अब वैश्विक मानकों के अनुरूप ‘चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर’ (CEO) मॉडल को अपना लिया है।”
बी. साईराम बने पहले CEO
कोल इंडिया बोर्ड की बैठक में लिए गए इस निर्णय के बाद, वर्तमान चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) बी. साईराम को अब कंपनी के पहले CEO के रूप में अतिरिक्त और औपचारिक दायित्व सौंपा गया है। यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। रेगुलेटरी फाइलिंग के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया गया है कि अब बोर्ड की अध्यक्षता और कार्यकारी अधिकार एक ही एकीकृत ढांचे के तहत काम करेंगे।
क्यों पड़ा बदलाव की जरूरत?
कंपनी सूत्रों और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस बड़े कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य कॉरपोरेट गवर्नेंस को आधुनिक बनाना है।
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वैश्विक मानक: दुनिया की दिग्गज ऊर्जा कंपनियों की तर्ज पर कोल इंडिया को ढालना।
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त्वरित निर्णय: निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी लाना और लालफीताशाही को कम करना।
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स्पष्ट जवाबदेही: उत्पादन लक्ष्य, रणनीतिक निवेश और ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) जैसे जटिल विषयों पर सीधी निगरानी सुनिश्चित करना।
निवेशकों और बाजार पर असर
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रशासनिक सुधार से कोल इंडिया की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता आएगी। एक ‘CEO-led’ मॉडल होने से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) में सुधार होगा।
कोल इंडिया का महत्व
बता दें कि कोल इंडिया भारत की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है। देश के बिजली उत्पादन में उपयोग होने वाले कोयले का एक बड़ा हिस्सा इसी महारत्न कंपनी से आता है। अपनी कई सहायक कंपनियों (Subsidiaries) के माध्यम से CIL भारत को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी है।




















