कल्पतरु का आश्रय लेकर वैश्विक स्तर पर हो रही भागवत कथाएं

पंडित श्यामसुंदर ने की मीडिया से बातचीत
कोरबा। पंडित श्याम सुंदर महाराज ने कहा कि कल्पतरु भागवत का आश्रय लेकर अधिकांश कथाकार भगवान की महिमा लोगों तक पहुंचा रहे हैं। पाकिस्तान में उर्दू संस्करण और ऑस्ट्रेलिया में शिखा देवी ने अंग्रेजी – संस्करण इसी से तैयार किया है और वह इस कार्य में जुटी हुए है। ऐसा तब हो सका है जब भगवत कृपा किसी पर होती है।कोरबा जिले के दीपका में श्रीमद् भागवत कथा में पहुंचे ग्वालियर निवासी – श्यामसुंदर महाराज ने बताया कि उनके परिवार में पिता या पितामह कथा की परंपरा से कभी नहीं जुड़े। वे वृंदावन में संतगणों के सानिध्य में आए मैं और फिर इस परंपरा का हिस्सा बने। 16 वर्ष की आयु से उन्होंने भागवत कथा करना प्रारंभ किया।उन्होंने बताया कि उनके लिखित कल्पतरु का आश्रय लेकर देश के अधिकांश कथावाचक बड़े प्लेटफार्म पर आयोजन को करते है। यह अच्छी बात है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि बड़े विद्धानों ने भागवत कथा की दिशा में महत्वपूर्ण काम करने पर विद्वत मार्तण्ड, महामहोपाध्याय, रसेस सहित कई उपाधियां प्रदान की है। श्रीमद् भागवत कथा की महिमा और उपयोगिता के समसामयिक संदर्भ में उसकी आवश्यकता के विषय पर पीएचडी करने वाले पंडित श्याम सुंदर महाराज ने कहा कि भागवत कृपा की प्राप्ति होने पर व्यक्ति फर्श से अर्श तक पहुंच सकता है और व्यक्ति को प्रसिद्धि दिला सकता है। उन्हें इस बात को खुशी है कि कल्पतरु का आश्रय लेकर भारत सहित विदेशों में भागवत कथा का वाचन हो रहा है और असंख्य लोगों तक यह महिमा पहुंच रही है।

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