सिर्फ आधार कार्ड से बने जन्म प्रमाण होंगे रद्द महाराष्ट्र-यूपी सरकार ने जारी किए दिशा निर्देश

मुंबई, २८ नवंबर ।
महाराष्ट्र सरकार ने एक आदेश जारी कर कहा है कि राज्य में देरी से बनने वाले जन्म प्रमाण पत्र के लिए आधार कार्ड को दस्तावेज नहीं माना जाएगा। साथ ही सरकार ने अगस्त 2023 के बाद से सिर्फ आधार कार्ड के जरिए बने सभी जन्म प्रमाण पत्र को भी रद्द करने का निर्देश दिया है। दरअसल सरकार ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र बनने से रोकने के लिए यह आदेश जारी किया है। सरकार का कहना है कि अवैध कामों में इन फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल हो रहा है। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सभी संदिग्ध दस्तावेजों को भी रद्द करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जिन्होंने फर्जी दस्तावेज जारी किए। राजस्व विभाग ने राज्य के सभी तहसीलदार, एसडीओ और जिला आयुक्तों और मंडल आयुक्तों को भी 16 बिंदुओं में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत आधार कार्ड को जन्म प्रमाण पत्र के लिए सबूत नहीं माना जा सकता। राजस्व मंत्री बावनकुले ने ये भी कहा कि आवेदक की जानकारी और आधार कार्ड की तारीख में कोई भी गड़बड़ी पाई गई तो पुलिस केस दर्ज किया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति असल दस्तावेज पेश नहीं कर पाता है तो उसके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को अवैध प्रवासियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताएँ हैं और किसी भी अवैध गतिविधि को सहन नहीं किया जाएगा। सरकारी बयान के अनुसार, सभी जिलों को अपने क्षेत्र में रहने वाले अवैध प्रवासियों की पहचान कर नियमों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया है। साथ ही हर जिले में अस्थायी निरुद्ध केंद्र बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जहाँ विदेशी नागरिकता वाले अवैध प्रवासियों को सत्यापन पूरा होने तक रखा जाएगा। सत्यापन के बाद उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनके मूल देश भेज दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश की नेपाल से खुली सीमा होने के कारण नेपाली नागरिकों का आवागमन बिना प्रतिबंध के है, जबकि अन्य देशों के नागरिकों के लिए जांच आवश्यक है। यह निर्देश ऐसे समय दिए गए हैं जब देशभर में चल रही स्ढ्ढक्र प्रक्रिया के तहत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संशोधन का काम चल रहा है, जिसकी अंतिम सूची 7 फरवरी 2026 को जारी होगी।देखा जाये तो आधार कार्ड को जन्म प्रमाणपत्र के स्थान पर अस्वीकार करने का उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार का निर्णय प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण लेकिन आवश्यक सुधार की ओर संकेत करता है। पिछले कई वर्षों में आधार को अनेक दस्तावेजों के लिए ‘सर्वस्वीकृत’ प्रमाण की तरह इस्तेमाल किया गया, लेकिन यह तथ्य नजऱअंदाज़ कर दिया गया कि आधार केवल पहचान का साधन है, जन्म का प्रमाण नहीं। जन्म प्रमाणपत्र एक कानूनी दस्तावेज है, जिसका आधार अभिलेखीय सत्यापन होता है, न कि स्वयं घोषित या अप्रमाणित जानकारी। इसलिए इन राज्यों का निर्णय तकनीकी रूप से सही और प्रक्रियागत स्पष्टता की दिशा में उचित कदम कहा जा सकता है।हालाँकि यह भी सच है कि इस निर्णय से लाखों नागरिकों को दस्तावेज़ी प्रक्रियाओं में कठिनाइयाँ आ सकती हैं— विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को, जिनमें कई लोग केवल आधार कार्ड को ही अपनी जन्मतिथि का मुख्य प्रमाण मानते आए हैं। इसलिए सरकारों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि विकल्पों की जानकारी, प्रमाणपत्र बनवाने की सरल प्रक्रिया और समयबद्ध सहायता उपलब्ध हो।

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