ट्रंप की चेतावनी के बीच ब्रिटेन का बड़ा कदम

बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने गुरुवार को दीर्घकालिक, स्थिर और व्यापक रणनीतिक साझेदारी विकसित करने पर सहमति जताई। चीन के साथ संबंधों को सुधारने के लिए स्टार्मर ऐसे समय बीजिंग पहुंचे, जब ब्रिटेन और अमेरिका के संबंध तनावपूर्ण हैं। इस दौरे से ट्रंप की नाराजगी का जोखिम है, क्योंकि वह पहले से ही अमेरिका के सबसे करीबी देशों पर टैरिफ लगा रहे हैं और उनकी आलोचना कर रहे हैं।बीजिंग स्थित ग्रेट हाल ऑफ पीपल में दोनों नेताओं की यह बैठक करीब 80 मिनट चली। इस पर वाशिंगटन की विशेष नजर रही। यह बैठक ऐसे समय हुई, जब कई वर्षों के तनाव के बाद दोनों देश अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।चिनफिंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को पिछले कुछ समय से गंभीर व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है। चीनी राष्ट्रपति ने इस बयान के जरिये ट्रंप की अप्रत्याशित नीतियों पर परोक्ष प्रहार किया। जबकि स्टार्मर ने चिनफिंग के साथ बैठक को उपयोगी बताया और कहा, मुझे लगता है कि दुनिया के लिए चुनौतीपूर्ण दौर में जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करने की जरूरत है। 2018 के बाद चीन का दौरा करने वाले स्टार्मर ब्रिटेन के पहले प्रधानमंत्री हैं। रॉयटर के अनुसार, मौजूदा दौर में राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस तरह की टैरिफ और कारोबारी नीतियां अपनाई है, उससे अमेरिका से उसके करीबी सहयोगी देशों के दूर होने का खतरा बढ़ गया है। ट्रंप के टैरिफ प्रेम के चलते वे व्यापार के लिए दूसरे विकल्प तलाशने लगे हैं।
इसका ताजा उदाहरण है कि ईयू ने भारत के साथ व्यापार समझौता किया तो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चीन के दौरे पर पहुंचे हैं। हालांकि यह भी सच है कि वे अमेरिकी सैन्य शक्ति की जरूरत से लंबे समय तक दूर नहीं रह सकते।टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट फार ग्लोबल चेंज के वरिष्ठ निदेशक एलेक्जेंडर जार्ज ने कहा, ‘यूरोपीय यूनियन को देखिए (ट्रंप की कारोबारी धमकियों के चलते) अचानक ध्यान केंद्रित किया और उन्होंने अपना काम किया।’ उन्होंने यह बात लैटिन अमेरिकी देशों और भारत के साथ यूरोपीय यूनियन के व्यापार समझौतों के संदर्भ में कही।

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