
कोरिया/चरचा कालरी। कालरी क्षेत्र में एसईसीएल प्रबंधन द्वारा स्थानीय कर्मचारियों के बच्चों को बैकुंठपुर स्थित केंद्रीय विद्यालय लाने-ले जाने हेतु अनुबंधित स्कूल बसों में ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से गंभीर लापरवाही लगातार बरती जा रही है। इनके द्वारा जानबूझकर परिवहन नियमों के धज्जियां उड़ाई जा रही हैं
परिवहन विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार— स्कूल बस के आगे और पीछे स्पष्ट रूप से वाहन नंबर अंकित होना अनिवार्य है।, बस में फस्र्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, और अन्य सुरक्षा उपकरण होने चाहिए।, बस में एक प्रशिक्षित हेल्पर / परिचालक का होना अनिवार्य है ताकि बच्चों की चढ़ाई-उतराई के समय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
लेकिन चौंकाने वाली हकीकत यह है कि, वर्तमान में संचालित इन बसों में न आगे और न ही पीछे कोई नंबर प्लेट है — यह क्रञ्जह्र के नियमों का सीधा उल्लंघन है। बसें जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय से कुछ ही दूरी पर खड़ी रहती हैं, फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों की आंखें बंद हैं, मानो वे किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हों। बस संचालन करने वाले ठेकेदार को इतनी छूट देना अपने आप में बेहद चिंतनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है हर जगह कमीशन का लालच ठीक नहीं होतासूत्रों के अनुसार, इन बसों में न फस्र्ट एड बॉक्स है न अन्य जरूरी सुविधाएं, और न ही कोई हेल्पर मौजूद रहता है। सिर्फ चालक के भरोसे मासूम बच्चों की जान दांव पर लगी हुई है। ड्राइवर का ध्यान आगे सडक़ पर रहता है, जबकि पीछे बच्चों के साथ क्या हो रहा है, इसका उसे अंदाजा तक नहीं होता। कई बार जल्दबाजी में उतरते समय बच्चे गिरकर चोटिल हो जाते हैं।सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन बसों में एसईसीएल के अधिकारियों, श्रमिक नेताओं और कर्मचारियों के अपने बच्चे भी यात्रा करते हैं फिर भी जिम्मेदार अधिकारी और श्रमिक नेता चुप्पी साधे बैठे हैं। उनका मौन रहना भविष्य के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।
यह स्थिति केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि मासूम जिंदगियों से खिलवाड़ है। जिला परिवहन अधिकारी और एसईसीएल के जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि वे तत्काल संज्ञान लें और शासकीय परिवहन नियमों के अनुसार सभी सुरक्षा प्रावधान सुनिश्चित करें — क्योंकि एक चूक, एक हादसा, कई मासूम घरों का चिराग बुझा सकती है





























