गौवंश पर क्रूरता का मामला, राष्ट्रीय गौ रक्षा वाहिनी ने की सख्त कार्रवाई की मांग

कोरिया बैकुंठपुर। जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर के अंतर्गत ग्राम तलवापारा से गौवंश के साथ अमानवीय व्यवहार का एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। दिनदहाड़े गांव में एक बेजुबान गौवंश के साथ की गई बेरहमी ने न केवल ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया, बल्कि पशु सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम तलवापारा में एक व्यक्ति द्वारा गौवंश को लाठी-डंडों से निर्दयतापूर्वक पीटा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मारपीट इतनी क्रूर थी कि गौवंश गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा और उठने की स्थिति में भी नहीं रहा। दर्द से कराहते गौवंश को देखकर आसपास मौजूद ग्रामीणों ने जब इसका विरोध किया, तो आरोपी ने उल्टे उन्हें धमकाने और दबाव बनाने का प्रयास किया। इस घटना के बाद गांव में तनाव और आक्रोश की स्थिति बन गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय गौ रक्षा वाहिनी, बैकुण्ठपुर जिला-कोरिया ने तत्काल संज्ञान लेते हुए थाना प्रभारी को एक लिखित शिकायत सौंपकर दोषी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। संगठन द्वारा दिए गए पत्र में इस कृत्य को अत्यंत निंदनीय और अस्वीकार्य बताया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि गौवंश के प्रति इस प्रकार की क्रूरता न केवल पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है, बल्कि समाज की सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों पर भी गहरा आघात है। राष्ट्रीय गौ रक्षा वाहिनी के जिला अध्यक्ष अनुराग दुबे ने इस संबंध में कहा कि गौवंश भारतीय समाज में आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, ऐसे में उसके साथ किया गया यह व्यवहार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि आरोपी के विरुद्ध तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन आंदोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होगा। इधर, ग्रामीणों ने भी एक स्वर में प्रशासन से मांग की है कि घायल गौवंश के समुचित इलाज, देखरेख और संरक्षण की तत्काल व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं के साथ हो रही इस तरह की घटनाएं समाज के लिए बेहद चिंताजनक हैं और इन्हें रोकने के लिए कानून का सख्ती से पालन आवश्यक है। यह मामला एक बार फिर पशु सुरक्षा, संवेदनशीलता और प्रशासनिक सक्रियता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अब सभी की निगाहें पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि दोषी के खिलाफ कब और कैसी ठोस कार्रवाई की जाती है।

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