
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने ‘उद्योग’ शब्द की व्यापक व्याख्या करने वाले 1978 के फैसले की वैधता पर सुनवाई पूरी कर ली है और अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस पर विचार कर रही है कि क्या ‘बेंगलुरु वाटर सप्लाई’ मामले में दिया गया फैसला सही था, जिसने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत करोड़ों श्रमिकों को सुरक्षा प्रदान की थी।
इस बीच, केंद्र सरकार ने गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि वह ”निश्चित रूप से श्रमिक विरोधी नहीं है” और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
सरकार का पक्ष: संतुलन और वैश्विक अर्थव्यवस्था सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ‘मजदूर विरोधी’ नहीं है और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ”हम एक वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं और हमें प्रबंधन के तरीकों पर निर्णय लेना होगा।” हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वन जैसे सरकारी विभागों को ‘उद्योग’ माना गया, तो इससे सरकारी गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।




























